CBSE टेंडर में गड़बड़ी उजागर करने वाले छात्र का बड़ा धमाका: सरकारी खर्च का पर्दाफाश करने के लिए लॉन्च किया 'पब्लिक पोर्टल'
नई दिल्ली: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों, तो एक अकेला इंसान भी सिस्टम में पारदर्शिता ला सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत ने। सीबीएसई (CBSE) के इवैल्यूएशन टेंडर में खामियां उजागर कर सुर्खियों में आए सार्थक ने अब सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक और क्रांतिकारी कदम उठाया है।
सार्थक ने भारत सरकार के सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल से करीब 1.66 करोड़ खरीद-फरोख्त (Tenders & Procurement) के रिकॉर्ड्स निकालकर एक ओपन-सोर्स पब्लिक पोर्टल लॉन्च कर दिया है।
दो हफ्ते की कड़ी मेहनत, अब जनता के हाथ में पूरा डेटा
सार्थक सिद्धांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर इस बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की। उन्होंने बताया कि करीब दो सप्ताह की दिन-रात की कड़ी मेहनत और तकनीकी विश्लेषण के बाद उन्होंने इस विशाल डेटाबेस को तैयार किया है।
बड़ी बात: अब यह पूरा डेटाबेस आम नागरिकों, खोजी पत्रकारों (Journalists) और शोधकर्ताओं (Researchers) के लिए पूरी तरह से मुफ्त (Free) उपलब्ध है। लोग इस डेटा को डाउनलोड कर सकते हैं और अपने स्तर पर इसकी गहन जांच कर सकते हैं।
क्या है इस पब्लिक पोर्टल का मुख्य उद्देश्य?
इस पोर्टल को बनाने के पीछे सार्थक का उद्देश्य बिल्कुल साफ है—"जनता का पैसा, जनता को हिसाब।"
पारदर्शिता (Transparency): आम नागरिकों को आसानी से यह पता चल सके कि देश के सरकारी खजाने का पैसा कहाँ और कैसे खर्च हो रहा है।
भ्रष्टाचार पर लगाम: जब सरकारी टेंडर्स और खरीद-फरोख्त का डेटा आसानी से उपलब्ध होगा, तो गड़बड़ियों को पकड़ना और भी आसान हो जाएगा।
पहले भी हिला चुके हैं सीबीएसई (CBSE) का सिस्टम
यह पहली बार नहीं है जब सार्थक ने व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले उन्होंने अपनी बोर्ड परीक्षा की आंसर शीट की स्कैन कॉपी निकलवाई थी। इसके बाद उन्होंने सीबीएसई के डिजिटल इवैल्यूएशन और ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जुड़े टेंडर दस्तावेजों का बारीक विश्लेषण (Analysis) किया था।
सार्थक के उस रिसर्च और सटीक खुलासों का असर यह हुआ कि उन्हें शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Education) के समक्ष पेश होने का मौका मिला, जहाँ उन्होंने देश के बड़े नीति-निर्माताओं के सामने अपनी बात रखी थी।
युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
एक तरफ जहाँ अमूमन 12वीं के छात्र सिर्फ अपनी पढ़ाई और करियर में व्यस्त रहते हैं, वहीं सार्थक सिद्धांत ने डेटा साइंस और खोजी दृष्टिकोण का इस्तेमाल कर देश के सामने एक मिसाल पेश की है। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है और इसे 'सिटिजन जर्नलिज्म' और 'डिजिटल एक्टिविज़्म' का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

