100 छात्र-छात्राओं का भविष्य सिर्फ 4 अध्यापकों के भरोसे, कैसे हो पढ़ाई!
बांसवाड़ा/राजस्थान।। सरकारें चाहे केंद्र की हों या राजस्थान की, शिक्षा के नाम पर हर साल करोड़ों रुपए का बजट पानी की तरह बहाया जाता है। 'नि:शुल्क और बेहतर शिक्षा' के बड़े-बड़े दावे करके सत्ता में बैठे लोग अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हटते। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह मुंह चिढ़ा रही है। विडंबना देखिए कि इस बदहाली पर विपक्ष भी चुप्पी साधे बैठा है, मानो उसे इस तमाशे से कोई सरोकार ही न हो।
आज हम बात कर रहे हैं राजस्थान के आदिवासी और जनजाति बाहुल्य क्षेत्र बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की। यहाँ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डींगरीफला बियापाडा में शिक्षा के मंदिर की जो हालत है, वह सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
100 बच्चों पर सिर्फ 4 शिक्षक: कैसे सुधरेगा भविष्य?
'राष्ट्रीय मानव धर्म सुरक्षा संघ' के पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों ने इस बदहाली को उजागर करते हुए बताया कि इस उच्च माध्यमिक विद्यालय में 100 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का जिम्मा महज 4 अध्यापकों के कंधे पर है।
सोचने वाली बात है कि एक उच्च माध्यमिक (Higher Secondary) स्कूल में जहाँ अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की जरूरत होती है, वहाँ सिर्फ 4 शिक्षक मिलकर सभी कक्षाओं और विषयों को कैसे संभाल सकते हैं? नतीजा यह है कि गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं, लेकिन बिना पढ़ाई के उनका भविष्य अंधकार में डूब रहा है।
नेताओं को सिर्फ 'सत्ता की मलाई' से सरोकार! स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि राजनीतिक दलों को सिर्फ अपने वोट बैंक और सत्ता के सिंहासन से मतलब है। गरीब और आदिवासी समाज के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे या शिक्षा से वंचित रहकर बेरोजगारी का ठप्पा झेलेंगे और मजदूरी के लिए पलायन करेंगे—इसकी परवाह किसी को नहीं है। शिक्षा विभाग के आला अधिकारी भी इस पूरी स्थिति को जानकर 'धृतराष्ट्र' की तरह आंखों पर पट्टी बांधे तमाशा देख रहे हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी: नहीं बदला स्टाफ तो होगी तालाबंदी
ग्रामीणों और सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों ने साफ लहजे में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते विद्यालय में पर्याप्त स्टाफ और विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
इसके तहत जिला और उपखंड मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जाएगा और स्कूल पर तालाबंदी (Lockout) की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी मौजूदा सरकार, स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी।
अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया शिक्षा विभाग इस खबर के बाद जागता है या इन नौनिहालों का भविष्य ऐसे ही भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।

