सपनों की उड़ान जेंडर की मोहताज नहीं: ऐश्वर्या ऋतुपर्णा (Aishwarya Rituporna) की संघर्ष और सफलता की मिसाल

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जेंडर नहीं, मेहनत तय करती है पहचान: भारत की पहली ट्रांसजेंडर सिविल सर्वेंट ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान की मिसाल

विशेष रिपोर्ट : "सपनों की उड़ान किसी सीमा की मोहताज नहीं होती।" इस बात को देश के प्रशासनिक ढांचे में अपनी मजबूत उपस्थिति से साबित किया है ओडिशा की ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान ने। ओडिशा वित्त सेवा (OFS) में वाणिज्यिक कर अधिकारी / डिप्टी कमिश्नर के रूप में कार्यरत ऐश्वर्या भारत की पहली ओपनली ट्रांसजेंडर सिविल सर्वेंट हैं। उनकी यह यात्रा केवल एक प्रशासनिक पद हासिल करने की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रहों, अपमान और उपेक्षा के खिलाफ एक ऐतिहासिक संघर्ष की मिसाल है।

सपनों की उड़ान जेंडर की मोहताज नहीं: ऐश्वर्या ऋतुपर्णा (Aishwarya Rituporna) की संघर्ष और सफलता की मिसाल

संघर्ष से सफलता तक का सफर

ओडिशा के कंधमाल जिले के एक छोटे से गांव (जी. उदयगिरि) में जन्मी ऐश्वर्या के लिए बचपन से ही राहें आसान नहीं थीं। स्कूल और कॉलेज के दिनों में सहपाठियों के तानों, बदसलूकी और सामाजिक बहिष्कार का सामना करने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उत्कल विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर और आईआईएमसी (IIMC) से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2010 में ओडिशा सिविल सेवा परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की।

वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को 'थर्ड जेंडर' के रूप में कानूनी मान्यता (NALSA फैसला) दिए जाने के बाद, ऐश्वर्या ने 2015 में पूरे आत्मसम्मान के साथ अपनी ट्रांसजेंडर पहचान को सार्वजनिक किया और आधिकारिक दस्तावेजों में अपना नाम ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान दर्ज कराया।

प्रमुख बिंदु: एक नजर में

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: भारत की पहली ऐसी सिविल सर्वेंट, जिन्होंने सेवा में रहते हुए खुलकर अपनी ट्रांसजेंडर पहचान को अपनाया।

  • शिक्षा बनी ताकत: कठिन परिस्थितियों और सामाजिक बहिष्कार के बावजूद उच्च शिक्षा हासिल कर ओडिशा वित्त सेवा (OFS) में जगह बनाई।

  • समानता का संदेश: ऐश्वर्या का मानना है कि किसी व्यक्ति की योग्यता और क्षमता उसके जेंडर से नहीं, बल्कि उसकी निष्ठा और मेहनत से तय होती है।

  • अधिकारों की आवाज: वे ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों, शिक्षा और मुख्यधारा में समावेश के लिए लगातार आवाज उठा रही हैं।

ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान की यह जीवन यात्रा उन सभी युवाओं के लिए एक टॉर्च-बियरर (दिशा-दर्शक) है जो अपने सपनों के रास्ते में आने वाली सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। यह कहानी संदेश देती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो समाज की पुरानी दीवारों को तोड़कर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।

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