संघर्ष से सफलता: कभी ऑटो चलाते थे सत्य शंकर, आज ₹800 करोड़ के साम्राज्य 'बिंदु जीरा' के हैं मालिक
नई दिल्ली: कहते हैं कि अगर इरादे बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो छोटी सी शुरुआत भी इतिहास रच सकती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है 'बिंदु जीरा' (Bindu Jeera) ब्रांड के संस्थापक सत्य शंकर की, जिन्होंने एक ऑटो चालक से लेकर ₹800 करोड़ का बिजनेस साम्राज्य खड़ा करने तक का अद्भुत सफर तय किया है।
छोटे गांव से हुई शुरुआत
कर्नाटक के पुट्टूर के पास स्थित एक बेहद छोटे से गांव से सत्य शंकर की यात्रा शुरू हुई थी। शुरुआती दिनों में उन्होंने अपने परिवार और खुद के जीवन यापन के लिए एक सरकारी योजना के तहत ऑटो रिक्शा खरीदा और उसे चलाना शुरू किया। मेहनत के बल पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने जल्द ही ऑटो से कार, फिर टैक्सी सर्विस, और बाद में एक गैराज व टायर डीलरशिप का काम भी संभाला।
एक ट्रिप और बदल गई किस्मत
साल 2002 में उत्तर भारत के एक दौरे ने सत्य शंकर के जीवन को एक नया मोड़ दिया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने 'जीरा मसाला सोडा' की लोकप्रियता और उसकी मांग को महसूस किया। उन्होंने समझ लिया कि अगर इस देसी स्वाद को सही पैकेजिंग और गुणवत्ता के साथ पेश किया जाए, तो यह बाजार में बड़ा कमाल कर सकता है।
₹35 लाख से ₹800 करोड़ का साम्राज्य
साल 2001 में महज ₹35 लाख की शुरुआती पूंजी के साथ उन्होंने SG Corporates की नीव रखी थी। इसके बाद सत्य शंकर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा:
2006: कंपनी का टर्नओवर ₹6 करोड़ पहुंचा।
2010: ब्रांड ने ₹100 करोड़ के आंकड़े को पार कर लिया।
2015: यूएई (UAE), सिंगापुर और मलेशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक एक्सपोर्ट शुरू हुआ।
आज बिंदु जीरा की ब्रांड वैल्यू ₹800 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
देसी स्वाद, ग्लोबल पहचान
'बिंदु जीरा' आज सिर्फ एक सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड नहीं, बल्कि “देसी आइडिया, ग्लोबल इंपैक्ट” का एक बेजोड़ उदाहरण है। सत्य शंकर का यह सफर उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं। यह कहानी साबित करती है कि ज़मीन से जुड़ी सोच और अटूट मेहनत के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है।

