आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी के खिलाफ 10 अगस्त को कोटड़ा, झाड़ोल और गोगुन्दा में 'जेल भरो आंदोलन'
उदयपुर : वन अधिकार अधिनियम-2006 की अनदेखी और आदिवासियों के विभिन्न अधिकारों में हो रही कटौती के विरोध में आगामी 10 अगस्त 2026 को उदयपुर जिले के कोटड़ा, झाड़ोल और गोगुन्दा में एक विशाल 'जेल भरो आंदोलन' का आयोजन किया जाएगा। यह व्यापक प्रदर्शन 'अखिल भारतीय किसान सभा' और 'आदिवासी जनाधिकार एका मंच' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें:
वन भूमि पट्टा आवंटन: 10 से 20 बीघा भूमि पर कब्जा होने के बावजूद आदिवासियों को महज 2 से 4 बीघा के पट्टे दिए जा रहे हैं। संगठन की मांग है कि नियमानुसार 25 बीघा तक के वन पट्टे दिए जाएं तथा बिलानाम भूमि का आवंटन कब्जाधारियों के नाम किया जाए।
पेंशन बहाली: बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या आंखों की पुतली) मैच न होने के कारण रोकी गई विधवा, विकलांग और वृद्धावस्था पेंशन को बिना किसी देरी के तुरंत पुनः शुरू किया जाए।
रोजगार एवं मनरेगा: मनरेगा के तहत प्रतिवर्ष कार्य दिवसों की संख्या बढ़ाकर 200 दिन की जाए और दैनिक मजदूरी 600 रुपये तय की जाए।
बिजली व कृषि नीतियां: प्रस्तावित बिजली विधेयक 2025 को वापस लिया जाए, स्मार्ट मीटर लगाने व बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तुरंत बंद हो। इसके साथ ही अमेरिका के साथ कृषि क्षेत्र में की गई ट्रेड डील को रद्द किया जाए।
आरक्षण, बजट एवं पेसा (PESA) कानून: पेसा अधिनियम 1996 को पूर्ण रूप से लागू किया जाए। आगामी जनगणना के आधार पर सरकारी नौकरियों व प्रशासनिक सेवाओं (TSP क्षेत्रों) में आदिवासी आबादी के अनुपात में पृथक आरक्षण और बजट का आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
व्यापक जनसंपर्क अभियान जारी
इस देशव्यापी आह्वान को सफल बनाने और आदिवासियों की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए संगठन के प्रमुख कार्यकर्ता—प्रेमचंद पारगी, जगदीश पारगी, दल्लाराम और हाकरचंद खराड़ी—झाड़ोल, कोटड़ा और गोगुन्दा के विभिन्न गांवों में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। आंदोलन के दिन भारी संख्या में आदिवासियों द्वारा गिरफ्तारी देने की संभावना है।

