बैंक धोखाधड़ी मामला: OBC के पूर्व स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा को 7 साल की कड़ी कैद, 1.25 लाख रुपये का जुर्माना
जयपुर/दौसा: सीबीआई की विशेष अदालत (जयपुर) ने बैंक धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग से जुड़े एक गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (OBC), शिवसिंहपुरा (लालसोट, दौसा) के तत्कालीन स्पेशल असिस्टेंट मुरारी लाल मीणा को दोषी ठहराते हुए 7 साल के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 1,25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
क्या था पूरा मामला?
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शिकायत पर 1 फरवरी 2019 को आपराधिक मामला दर्ज किया था।
पद का दुरुपयोग: मुरारी लाल मीणा ने बैंक में स्पेशल असिस्टेंट के पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया।
फर्जी 'नो ड्यूज' सर्टिफिकेट: आरोपी ने उन ऋण खातों के लिए भी अनाधिकृत रूप से 'नो ड्यूज' (No Dues) प्रमाण पत्र जारी कर दिए, जिन पर बैंक की देनदारियां बकाया थीं।
बैंक को भारी नुकसान: फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए गिरवी रखी गई संपत्तियों और प्रतिभूतियों (Collateral Securities) को अवैध रूप से रिहा करवा दिया गया। इसके चलते बैंक को तीन अलग-अलग लोन खातों में कुल 12,14,660.71 रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
जांच और अदालती प्रक्रिया
1 फरवरी 2019: सीबीआई द्वारा केस दर्ज किया गया।
30 सितंबर 2019: विस्तृत जांच के बाद सीबीआई ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
12 अक्टूबर 2022: अदालत द्वारा आरोपी के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए।
अदालत ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सुनवाई पूरी करते हुए मुरारी लाल मीणा को दोषी पाया और यह सख्त सजा सुनाई। बैंक में वित्तीय अनियमितता करने वालों के लिए अदालत का यह फैसला एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

