त्योहारों से पहले खाद्य विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल: छोटे दुकानदारों पर चाबुक, रिहायशी कॉलोनियों में चल रहे बड़े डेयरी प्लांटों पर मेहरबानी?
बांसवाड़ा। आगामी त्योहारों को देखते हुए जिले में खाद्य विभाग ने मिलावटखोरी के खिलाफ 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान के तहत धरपकड़ तेज कर दी है। जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव के निर्देशों पर फूड इंस्पेक्टर उमेद सिंह टेलर की टीम ने कस्बे व आसपास की तीन डेयरियों पर अचानक छापेमारी कर पनीर के सैंपल जुटाए। इस कार्रवाई के लिए मौके पर मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन भी बुलाई गई और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता व स्वच्छता का निरीक्षण किया गया। सैंपल प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं और रिपोर्ट आने पर कड़ी कार्रवाई का दावा किया गया है।
कार्रवाई पर उठते गंभीर सवाल: बड़े मगरमच्छों पर खामोशी क्यों?
विभाग की इस धरपकड़ के बीच स्थानीय लोगों और छोटे व्यापारियों में भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने के लिए केवल छोटे दुकानदारों और डेयरियों को निशाना बना रहा है, जबकि बांसवाड़ा के हाउसिंग बोर्ड जैसी घनी आबादी वाली रिहायशी कॉलोनियों में बिना किसी डर के बड़े स्तर पर दूध-डेयरी के मिलावटी कमर्शियल प्लांट बेखौफ संचालित हो रहे हैं।
आवास क्षेत्रों में गैर-कानूनी रूप से चल रहे इन बड़े डेयरी प्लांटों से न केवल नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि गुणवत्ता और स्वच्छता के मानकों पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारी इन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं।
जनता की मांग: निष्पक्ष हो जांच
स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से निष्पक्षता की मांग की है। उनका कहना है कि अगर विभाग वास्तव में मिलावटखोरी खत्म करना चाहता है, तो उसे रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे इन बड़े डेयरी प्लांटों की गहन जांच करनी चाहिए, न कि केवल छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई करके खानापूर्ति करनी चाहिए।

