बांसवाड़ा पंचायती राज चुनाव 2026: आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया सम्पन्न, 16 प्रधान पदों पर ST वर्ग का कब्ज़ा; 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
बांसवाड़ा : जिले में पंचायती राज चुनाव 2026 का बिगुल बजते ही चुनावी चौपालें सजने लगी हैं। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समिति प्रधान पदों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सम्पन्न हुई।
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव और अतिरिक्त जिला कलेक्टर पर्वत सिंह की उपस्थिति में आयोजित इस प्रक्रिया का सबसे आकर्षण का केंद्र एक नन्हीं बच्ची रही, जिससे निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पर्चियां खुलवाई गईं। इस पहल की वहां उपस्थित सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की।
1. प्रधान पदों का गणित: 16 में से 8 सीटें ST महिला और 8 ST पुरुष के लिए
जिले की कुल 16 पंचायत समितियों के प्रधान पदों के आरक्षण की तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो चुकी है। बांसवाड़ा में इस बार सभी 16 प्रधान पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हुए हैं, जिनमें से 8 सीटें ST महिला और 8 सीटें ST पुरुष के खाते में गई हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की समितियों में महिला नेतृत्व को आगे लाने की दिशा में 50% महिला आरक्षण को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
2. जिला परिषद की 43 सीटों पर 50% महिला प्रतिनिधित्व
प्रधान पदों के साथ-साथ जिला परिषद सदस्य की 43 सीटों के लिए भी लॉटरी निकाली गई।
3. 280 पंचायत समिति सदस्यों के लिए भी आरक्षण तय
जिले की 16 पंचायत समितियों के अंतर्गत कुल 280 वार्डों के पंचायत समिति सदस्यों के पदों का आरक्षण भी पूरा कर लिया गया है। इसमें SC, ST, OBC एवं सामान्य वर्ग के नियमानुसार 50% महिला आरक्षण के प्रावधानों का पूर्ण पालन किया गया है।
चुनावी आँकड़े और तैयारियाँ एक नज़र में:
कुल मतदाता: 12,74,482 (जिनमें बड़ी संख्या में युवा व पहली बार वोट डालने वाले मतदाता शामिल हैं)
पारदर्शिता का पैमाना: संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई और सर्वदलीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अगला कदम: जल्द ही चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी और आचार संहिता लागू होगी।
गाँव-गाँव में सियासी सरगर्मी तेज़
आरक्षण का पिटारा खुलते ही बांसवाड़ा के ग्रामीण अंचलों में राजनीतिक हलचल अचानक बढ़ गई है। कई पुराने दिग्गजों के समीकरण बदले हैं, वहीं महिला आरक्षित सीटों पर इस बार पढ़ी-लिखी और युवा महिला प्रत्याशियों की दावेदारी से नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।

