अखंड भक्ति का महाकीर्तिमान: चलित रथ पर 9 घंटे 11 मिनट तक आरती कर पंडित कुलदीप त्रिवेदी ने रचा इतिहास
धार / रतलाम : सनातन संस्कृति, अटूट आस्था और अदम्य संकल्प का एक अलौकिक दृश्य मध्यप्रदेश के राजा भोज की नगरी धार में देखने को मिला। भगवान धारनाथ की भव्य राजसी सवारी (छबीना) के दौरान रतलाम के सुप्रसिद्ध पंडित कुलदीप त्रिवेदी ने चलित रथ पर लगातार 9 घंटे 11 मिनट तक अखंड आरती कर नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को 'लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया है।
21 किलो चांदी के आभूषणों से सजा बाबा का दरबार आदेश आरती मंडल द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में भगवान महाकाल के विग्रह को 21 किलो चांदी के मुकुट, हार, बाजूबंद, त्रिशूल और डमरू से अलौकिक रूप से सजाया गया था। फूलों से सजे चलित रथ पर बाबा के दर्शन के लिए सड़कों पर हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
कठिन साधना और कड़े नियम उज्जैन महाकाल मंदिर के नित्य आरतीकर्ता पंडित कुलदीप त्रिवेदी ने लगातार 9 घंटे 11 मिनट तक बिना रुके, बिना बैठे और बिना जल ग्रहण किए इस अखंड आरती को संपन्न किया।
समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 6:11 बजे तक।
सामग्री: महाआरती में 11 किलो शुद्ध कपूर, 21 किलो चांदी के दीप और सैकड़ों लीटर घी का उपयोग हुआ।
विश्व रिकॉर्ड: इससे पूर्व चलित रथ पर सबसे लंबी एकल आरती का रिकॉर्ड 7 घंटे 30 मिनट का था, जिसे ध्वस्त करते हुए नया इतिहास रचा गया।
लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज सवारी के समापन पर लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने वीडियोग्राफी और नियमों की जांच के बाद पंडित कुलदीप त्रिवेदी को "चलित रथ पर सबसे लंबी एकल अखंड नित्य आरती" के ऑफिशियल सर्टिफिकेट और मेडल से सम्मानित किया।
मध्य प्रदेश से राजस्थान तक उल्लास इस भक्तिमयी क्षण के साक्षी बनने धार, रतलाम, उज्जैन, इंदौर के साथ-साथ राजस्थान के बांसवाड़ा और कुशलगढ़ से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया। पंडित कुलदीप ने इसे बाबा महाकाल की कृपा और सनातन धर्म की शक्ति का परिणाम बताया है।




