मानवता की मिसाल बना ‘अपना घर आश्रम’: 15 माह से लापता व्यक्ति का कराया परिवार से पुनर्मिलन; अब तक 90 बेघर आश्रितों का सफल पुनर्वास
रतलाम (मध्य प्रदेश) : “जा पर कृपा राम की होई, ता पर कृपा करें सब कोई...” — यह पंक्तियां रतलाम स्थित 'अपना घर आश्रम' में उस वक्त बिल्कुल सटीक साबित हुईं, जब पिछले 15 महीनों से अपने परिवार से बिछड़े नागदा जंक्शन निवासी दिनेश प्रजापत का सकुशल पुनर्मिलन संभव हो सका। अत्यधिक नशे की लत के कारण अपनी मानसिक स्थिति खो चुके दिनेश को आश्रम के निस्वार्थ प्रयासों, चिकित्सकीय देखभाल और काउंसलिंग के दम पर एक नया जीवन मिला है।
सालाखेड़ी से हुआ था रेस्क्यू
तकरीबन 15 महीने पहले, रतलाम के सालाखेड़ी क्षेत्र से एक स्थानीय नागरिक की सूचना पर 'अपना घर आश्रम' की टीम ने दिनेश को अत्यंत दयनीय और अस्वस्थ हालत में रेस्क्यू किया था। नशे की लत के कारण वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे थे और अपनों से दूर भटक गए थे। आश्रम में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों, इंदौर के नर्सिंग अधिकारियों और मनोचिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज शुरू हुआ। नियमित देखभाल का ही नतीजा रहा कि उनकी स्थिति में अभूतपूर्व सुधार आया।
शुरुआत में परिवार को नहीं हुआ विश्वास
दिनेश के पूरी तरह स्वस्थ होने पर आश्रम प्रबंधन ने उनके बड़े भाई लक्ष्मण प्रजापत और परिजनों से संपर्क साधा। इतने लंबे समय तक गायब रहने के कारण परिवार को एक पल के लिए इस खबर पर यकीन ही नहीं हुआ। हालांकि, आश्रम के ढांढस बंधाने के बाद जब भाई और भाभी रतलाम पहुंचे, तो दिनेश को पूरी तरह ठीक और व्यवस्थित जीवनशैली में देखकर उनकी आंखें भर आईं।
90वें आश्रित का सफल पुनर्वास
आश्रम से विदा होते समय दिनेश ने फिर कभी नशा न करने और सम्मानजनक जिंदगी जीने का संकल्प लिया। परिजनों संग रवाना होते वक्त माहौल बेहद भावुक हो गया। इस पुनर्मिलन के साथ ही रतलाम के 'अपना घर आश्रम' ने अब तक 90 लावारिस व अस्वस्थ आश्रितों को उनके परिवारों से मिलाने और पुनर्वासित करने का कीर्तिमान स्थापित किया है।
'अपना घर आश्रम' का राष्ट्रीय सेवा मॉडल
यह संस्थान देशभर में सड़कों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर लाचार स्थिति में घूम रहे बेघर, मानसिक व शारीरिक रूप से असहाय लोगों को आश्रय और नया जीवन प्रदान करता है। यहां हर आश्रित को 'प्रभु जी' (ईश्वर का रूप) मानकर निस्वार्थ सेवा की जाती है।
निःशुल्क संपूर्ण देखभाल: रेस्क्यू किए गए आश्रितों को मुफ्त आवास, भोजन, वस्त्र, मेडिकल केयर और साइकियाट्रिक काउंसलिंग दी जाती है।
पारिवारिक पुनर्मिलन: आश्रितों के ठीक होने पर आश्रम का पहला उद्देश्य उन्हें सुरक्षित उनके घर पहुंचाना होता है।
जनभागीदारी से संचालन: यह संस्था पूरी तरह से समाज के दानदाताओं, स्वयंसेवकों और आम जनता के सहयोग से संचालित होती है।

