जालिमपुरा का 'डबल धमाका': खो-खो में लाडली ने तो फुटबॉल में लाड़लों ने बजाया जीत का डंका, राज्य स्तर पर लहराया परचम
बांसवाड़ा : राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जालिमपुरा इन दिनों पूरे वागड़ अंचल में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सीमित साधनों और कच्चे मैदान के बावजूद एक ही पंचायत और एक ही सरकारी स्कूल के खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में ऐसा इतिहास रचा है कि पूरे जिले का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है।
हाल ही में जालिमपुरा की लाडली काजल गरासिया ने खो-खो में जिला स्तर पर चौथी बार 'बेस्ट प्लेयर' का खिताब जीतकर राज्य स्तर पर कदम रखा था। अब इसी विद्यालय के दो होनहार लाड़लों ने फुटबॉल में राज्य स्तर पर चयन हासिल कर सफलता की नई कहानी लिख दी है।
फुटबॉल के मैदान में चमके दो सितारे
पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जालिमपुरा के प्रतिभाशाली छात्र चिन्मय रावत (पुत्र श्री अनिल रावत) और यश रावत (पुत्र श्री सुनील रावत) ने अपनी लगन से वह मुकाम हासिल किया है, जो बड़े-बड़े शहरों के बच्चों के लिए भी एक सपना होता है।
जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में बांसवाड़ा जिले की टीम को शानदार प्रदर्शन दिलाने में इन दोनों खिलाड़ियों का मुख्य योगदान रहा:
चिन्मय रावत (मिडफील्डर): मैदान के बीच में बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए कई निर्णायक गोल दागे और टीम के लिए जीत की राह बनाई।
यश रावत (डिफेंडर): रक्षापंक्ति में मजबूत दीवार की तरह डटकर विरोधी टीमों के हर आक्रामक हमले को नाकाम किया।
दोनों खिलाड़ियों के इस उत्कृष्ट तालमेल और खेल कौशल को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन्हें राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चुना है।
एक ही स्कूल, तीन-तीन राज्य स्तरीय खिलाड़ी
पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जालिमपुरा अब वागड़ अंचल में खेल का नया केंद्र बनकर उभरा है। एक ही सत्र में एक ही स्कूल से तीन खिलाड़ी (काजल गरासिया, चिन्मय रावत और यश रावत) राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
"हमारे पास संसाधन सीमित हैं और ग्राउंड भी कच्चा है, लेकिन बच्चों के भीतर जुनून कूट-कूटकर भरा है। चिन्मय और यश रोजाना सुबह-शाम 3 से 4 घंटे कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी यही निरंतरता सफलता का कारण बनी है।"
— शारीरिक शिक्षक, पीएम श्री राउमावि जालिमपुरा
गांव में जश्न का माहौल, परिजनों की आंखें हुईं नम
जैसे ही चिन्मय और यश के राज्य स्तर पर चयन की खबर जालिमपुरा पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। सरपंच, वार्ड पंच और ग्रामीणों ने खिलाड़ियों के घर पहुंचकर ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ परिजनों को बधाई दी।
चिन्मय के पिता अनिल रावत: "हम मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन बच्चों के सपनों के आगे कभी तंगहाली को आड़े नहीं आने दिया। आज बेटे की इस उपलब्धि ने हमारी सारी मेहनत सफल कर दी।"
यश के पिता सुनील रावत: "यह केवल हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे जालिमपुरा गांव की संयुक्त जीत है।"
वागड़ की ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशने की जरूरत
जालिमपुरा के इन बच्चों की सफलता साबित करती है कि आदिवासी अंचल की प्रतिभाओं में हुनर की कोई कमी नहीं है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों के इन खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं, आधुनिक ट्रैक और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो ये बच्चे आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी राजस्थान और देश का नाम रोशन करने का मादा रखते हैं।

