'लेडी सिंघम' मंजिल सैनी: किडनी रैकेट के पर्दाफाश से NSG DIG तक, निडरता और जवाबदेही की मिसाल
लखनऊ/नई दिल्ली : भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की दुनिया में कई अधिकारी अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, लेकिन 2005 बैच की IPS अधिकारी मंजिल सैनी की कहानी सिर्फ बहादुरी तक सीमित नहीं है—यह निडरता, दूरदर्शिता और प्रशासनिक ईमानदारी का एक अनूठा संगम है। मुरादाबाद में अपनी पहली ही पोस्टिंग के दौरान अमित कुमार के चर्चित किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ करने वाली इस महिला अधिकारी को उत्तर प्रदेश पुलिस में "लेडी सिंघम" के नाम से जाना जाता है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की गोल्ड मेडलिस्ट से IPS बनने का सफर
1975 में दिल्ली में जन्मीं मंजिल सैनी का अकादमिक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है। दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से फिजिक्स की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने 'दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' (DSE) से पढ़ाई की और गोल्ड मेडल हासिल किया। करीब तीन साल तक कॉरपोरेट सेक्टर में सफल नौकरी करने और शादी के बाद, उन्होंने सिविल सर्विसेज की ओर रुख किया।
जब उन्होंने UPSC की परीक्षा दी, तब वह गर्भवती थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की और IPS में शामिल होने वाली पहली विवाहित महिला बनीं। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला, जहाँ मुरादाबाद में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के रूप में उनकी पहली तैनाती हुई।
पहली पोस्टिंग में ही हिला दिया था देश, लखनऊ की बनीं पहली महिला SSP
मुरादाबाद में चार्ज संभालने के महज छह महीने के भीतर एक गरीब मजदूर की शिकायत पर मंजिल सैनी ने गुड़गांव और पश्चिमी यूपी में फैले अवैध किडनी तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया। गरीब मजदूरों को बंधक बनाकर और नशीली दवाएं देकर उनकी किडनी निकालने वाले इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह की जांच बाद में CBI को सौंपी गई।
इसके बाद बदायूं, मुजफ्फरनगर, इटावा और मथुरा जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों की कमान संभालने के बाद, मई 2016 में राज्य सरकार ने उन्हें लखनऊ का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नियुक्त किया। उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में लखनऊ की SSP बनने वाली वह पहली महिला अधिकारी बनीं।
मुठभेड़ में बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक
जनवरी 2024 में मंजिल सैनी को 'राष्ट्रपति पुलिस पदक (वीरता)' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 2017 में मेरठ में हुए एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस के दौरान अपहृत डॉक्टर श्रीकांत को सुरक्षित छुड़ाने और बदमाशों का मुकाबला करने के लिए दिया गया। वह उत्तर प्रदेश की अब तक की महज दूसरी महिला IPS अधिकारी हैं, जिन्हें इस प्रतिष्ठित वीरता पदक से नवाजा गया है।
जब व्यवस्था की चूक पर खुद कबूली पुलिस की नाकामी
मंजिल सैनी के करियर का एक ऐसा पहलू भी है जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है—गलती स्वीकार करने का साहस। 1 फरवरी 2017 को लखनऊ के चर्चित कारोबारी श्रवण साहू की हत्या कर दी गई, जो अपने बेटे के हत्यारों के खिलाफ मुख्य गवाह थे और सुरक्षा की मांग कर रहे थे।
हत्या के ठीक बाद लखनऊ की तत्कालीन SSP मंजिल सैनी ने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि * "यह पुलिस व्यवस्था की विफलता थी।"* आमतौर पर आला अधिकारी ऐसे मामलों में पल्ला झाड़ते नजर आते हैं, लेकिन सैनी ने निडर होकर नाकामी को स्वीकारा।
बाद में CBI जांच के आधार पर बैठी विभागीय जांच कमेटी (2023) ने उन्हें पूरी तरह से क्लीन चिट दी। जांच में पाया गया कि मंजिल सैनी ने श्रवण साहू की सुरक्षा के लिए सिफारिश भेजी थी, लेकिन तत्कालीन प्रशासन (DM स्तर) से समय पर सुरक्षा बल उपलब्ध कराने में चूक हुई थी।
वर्तमान तैनाती
एक तरफ निडरता से गिरोहों का पर्दाफाश करना और दूसरी तरफ अपनी ही व्यवस्था की खामियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकारने का साहस—मंजिल सैनी का यह व्यक्तित्व उन्हें बेहद खास बनाता है। वर्तमान में IPS मंजिल सैनी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) में डीआईजी (DIG) के पद पर प्रतिनियुक्ति पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।

