राजस्थान में कानून का शिकंजा: बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व मैनेजर को 7 साल की जेल; 2 करोड़ रिश्वत मामले में SOG के ASP मुकेश सोनी निलंबित
जयपुर / उदयपुर | विशेष समाचार : राजस्थान में भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों के खिलाफ जांच एजेंसियों और सरकार का सख्त रुख देखने को मिला है। एक तरफ जहां सीबीआई की विशेष अदालत (जयपुर) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुए 3.61 करोड़ रुपये के गबन मामले में पूर्व शाखा प्रबंधक को 7 साल की कड़ी सजा सुनाई है, वहीं दूसरी ओर उदयपुर में भूखंड फर्जीवाड़े के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के एएसपी मुकेश कुमार सोनी को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है।
1. बैंक ऑफ महाराष्ट्र धोखाधड़ी मामला: पूर्व शाखा प्रबंधक को 7 साल की जेल, ₹2.85 लाख का जुर्माना
जयपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम भरोसे मीणा को 3.61 करोड़ रुपये के गबन और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के कठोर कारावास और 2.85 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले के सह-आरोपी (निजी व्यक्ति) माखन लाल मीणा को भी 3 साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है।
बिना कागजात व सिक्योरिटी के बांटे थे 17 लोन
मामला: यह घटना जयपुर के गोपालपुरा बाईपास शाखा की है, जहां तत्कालीन प्रबंधक राम भरोसे मीणा ने 15 जनवरी 2015 से 6 मई 2015 के दौरान अपने पद का दुरुपयोग कर 17 खातों में अवैध रूप से लोन मंजूर किए थे।
सीबीआई जांच: सीबीआई जांच में उजागर हुआ कि लोन के लिए न तो वैध आवेदन पत्र थे और न ही आवश्यक दस्तावेज या सिक्योरिटी। धोखाधड़ी के इस खेल से बैंक को सीधे ₹3.61 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ।
कार्रवाई का घटनाक्रम: 9 नवंबर 2016 को बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। 9 जुलाई 2020 को चार्जशीट दाखिल की गई, जिस पर ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया।
2. उदयपुर रिश्वत कांड: SOG के ASP मुकेश कुमार सोनी निलंबित, 2 करोड़ रुपये मांगने का आरोप
उदयपुर में 2 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल रिश्वत कांड में गिरफ्तार एसओजी (SOG) के एएसपी मुकेश कुमार सोनी पर राज्य सरकार ने कड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट और मुख्यमंत्री कार्यालय की मंजूरी के बाद गृह विभाग ने एएसपी सोनी के निलंबन का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। उनका निलंबन 27 सितंबर से प्रभावी माना गया है।
मोबाइल पर टाइप करके मांगी थी रिश्वत, 272 भूखंडों के फर्जीवाड़े से जुड़ा है मामला
रिश्वत का मामला: आरोप है कि उदयपुर के 272 भूखंडों से जुड़े मामले में आरोपियों को राहत देने और फाइल बंद करने के बदले एएसपी सोनी ने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।
बिचौलिए के जरिए ट्रैप: एसीबी ने 26 सितंबर को बिचौलिए सज्जन सिंह जैन को ₹2 करोड़ की रिश्वत राशि लेते हुए गिरफ्तार किया था, जिसके बाद 27 सितंबर को एएसपी मुकेश सोनी की गिरफ्तारी हुई।
डिजिटल सबूत: एसीबी के मुताबिक, सोनी ने रिश्वत की रकम मौखिक रूप से बोलने के बजाय अपने मोबाइल फोन में टाइप करके दिखाई थी। एजेंसी ने तीन दिनों तक डिजिटल रिकॉर्डिंग और व्हाट्सऐप कॉल वेरिफिकेशन के जरिए रिश्वत की मांग की पुष्टि की है।
फाइलों में छेड़छाड़ की जांच: एसीबी ने सोनी के दफ्तर से नगर निगम और अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UDA) की मुहर लगी 41 भूखंडों की फाइलें बरामद की हैं। जांच की जा रही है कि दस्तावेजों पर लगी मुहरें और लीज डीड असली हैं या फर्जी।
प्रशासनिक व न्यायिक हलकों में हड़कंप
एक ही समय में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में करोड़ों के गबन पर अदालत का सख्त फैसला और पुलिस विभाग की विशेष जांच इकाई (SOG) के एएसपी स्तर के अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई से प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

