धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने माना गंभीर अपराध
बांसवाड़ा/राजस्थान।। भोले-भाले और गरीब लोगों का ब्रेनवाश कर जबरन ईसाई धर्मांतरण कराने और विरोध करने पर गौ-रक्षकों पर हमला करने के मामले में मुख्य आरोपी को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कुशलगढ़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ Court) के न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी ईश्वर (निवासी- कलिंजरा) की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद आरोपी को अभी जेल की सलाखों के पीछे ही दिन बिताने होंगे।
साधु-संतों और सनातनियों ने दर्ज कराया था मामला
दरअसल, जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में मजबूरी और अंधविश्वास का फायदा उठाकर धर्मांतरण कराने का एक बड़ा खेल सामने आया था। जब स्थानीय गौ-भक्तों और सनातनियों ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की थी। इसके बाद साधु-संतों, सनातनियों और गौ-भक्तों ने एकजुट होकर कुशलगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।
न्यायालय में हुई तीखी बहस
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच जोरदार बहस हुई।
सरकारी पक्ष: राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक ईश्वर लाल पटेल ने पैरवी की।
परिवादी पक्ष: परिवादी रवि भाभोर की ओर से अधिवक्ता पुष्पेंद्र त्रिपाठी ने कड़ा रुख अपनाते हुए घटना से जुड़े फोटोग्राफ्स, एफआईआर और अन्य पुख्ता दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए।
अधिवक्ता त्रिपाठी ने कोर्ट में श्रीगंगानगर के श्री रणकपुर थाने में दर्ज एक एफआईआर का हवाला दिया। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पुराने फैसलों की नजीर पेश करते हुए दलील दी कि, “आरोपियों ने अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों को प्रलोभन देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास किया और विरोध करने पर गौ-भक्तों को चोटें पहुंचाईं।” अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए अपराध को गंभीर माना और जमानत देने से इनकार कर दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में फैला है अवैध चर्चों का जाल: संगठनों ने उठाई मांग
इस घटना के बाद से ही स्थानीय संगठनों में भारी आक्रोश है। साधु-संतों, राष्ट्रीय मानव धर्म रक्षा संघ, नारी शक्ति और सनातन समाज ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय सूत्रों और संगठनों का दावा है कि कुशलगढ़ उपखंड के ग्रामीण क्षेत्रों जैसे दरोबडीया, पाणदा, महुडा, खेड़ली, वरसाला पंचायत के आमलीपाडा, शोभावटी, बावलियापाडा, सातलिया ग्राम पंचायत के महुडा दर्रा और बिजोरी सहित विभिन्न गांवों-ढाणियों में करीब 75 से अधिक अवैध प्रोटेस्टेंट ईसाई मिशनरियां सक्रिय हैं। आरोप है कि यहाँ बिना अनुमति के चर्चों का निर्माण कर हर रविवार को प्रार्थना की आड़ में धर्मांतरण का गोरखधंधा चलाया जा रहा है।
प्रशासन से 'धर्मांतरण के खेल' को बेनकाब करने की मांग
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने सरकार व जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि जनजाति क्षेत्र की संस्कृति और जनसांख्यिकी को बचाने के लिए इन अवैध गतिविधियों को चिन्हित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इन अवैध चर्चों और इसके पीछे काम कर रहे चेहरों की कानूनी जांच कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भोले-भाले आदिवासियों को इस जाल से बचाया जा सके।

