उदयपुर के भींडर में बड़ा हादसा: राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा में छत का प्लास्टर गिरा, 3 मासूम गंभीर घायल; ग्रामीणों में भारी आक्रोश
उदयपुर (राजस्थान) : राजस्थान में लगातार सरकारी स्कूलो में हो रहे हादसों को लेकर सरकार की उदासीनता बताती है की अच्छे दिनों वाली सरकार का सिर्फ पार्टी कार्यालय चमचमाना चाहिए या फिर मुँहबोली राष्ट्रवादी पार्टी के नेताओं के लिए बनी आलिशान संसद के आगे उन्हें कोई लेना देना नहीं है। वही राजस्थान में सरकारी स्कूलों में पढ़ना अब बच्चों के लिए जानलेवा मौत का कुंवा साबित होता जा रहां है, इस बात का इल्म हर किसी को है कि पीछले कुछ समय पहले ही राजस्थान के झालावाड़ (पिपलोदी गांव) में तो सरकारी स्कूल के अचानक हुए हादसे ने कई बच्चों को मौत के आगोश में ले लिया था, तो जयपुर, बूंदी, बांसवाड़ा ओर डूंगपुर के सरकारी विद्यालयों की जर्जर इमारते अबोध बच्चो के साथ मौत के कुएं का खेल खेलने पर आमादा है। वही अब उदयपुर जिले के भींडर थाना क्षेत्र अंतर्गत वाणियातलाई ग्राम पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय (नारदा) में मंगलवार सुबह एक भयानक हादसा होते-होते टल गया। रोजमर्रा की तरह जब बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तभी अचानक जर्जर छत का प्लास्टर भरभरा कर सीधा मासूम बच्चों पर आ गिरा। इस घटना से क्लासरूम में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। हादसे में 3 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि 2 अन्य को हल्की चोटें आई हैं।
32 मासूमों के सिर पर मंडराया काल, गनीमत रही बच गई जान
घटना के समय कमरा नंबर 1 में विभिन्न कक्षाओं के कुल 32 बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक जोरदार आवाज के साथ सीमेंट और कंक्रीट का भारी टुकड़ा नीचे गिरा।
गंभीर रूप से घायल छात्र:
कृष्णा कुमारी (कक्षा 1)
कार्तिक (कक्षा 1)
गणेशलाल (कक्षा 5)
त्वरित उपचार: हादसे के तुरंत बाद लहूलुहान बच्चों को भींडर के राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया। वहां डॉक्टरों की टीम ने प्राथमिक उपचार के बाद चोटों की स्थिति को देखते हुए प्राथमिक चिकित्सा दी और स्थिति स्थिर होने पर उन्हें घर भेज दिया।
25 साल पुराना भवन, घटिया निर्माण और प्रशासनिक अनदेखी
स्कूल के हेडमास्टर लालसिंह शक्तावत ने बताया कि विद्यालय का यह भवन वर्ष 2001 में निर्मित हुआ था। लगभग 25 साल पुराने इस भवन में निर्माण कार्य की गुणवत्ता शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही है। वर्तमान में स्कूल में कुल 37 बच्चे नामांकित हैं।
हेडमास्टर के अनुसार, भवन की अत्यंत जर्जर हालत को देखते हुए इसकी लिखित सूचना और मरम्मत/पुनर्निर्माण की मांग शिक्षा विभाग को पहले ही भेजी जा चुकी थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: "अधिकारियों की लापरवाही से जा सकती थी जान"
हादसे की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक स्कूल परिसर में एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोष जताया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि:
"हम लगातार अधिकारियों को चेतावनी दे रहे थे कि यह जर्जर भवन बच्चों के लिए काल बन सकता है। गनीमत रही कि केवल प्लास्टर का हिस्सा गिरा और पूरी छत नहीं ढही, वरना आज कई घरों के चिराग बुझ जाते। जब तक बच्चों के लिए सुरक्षित भवन नहीं बनता, तब तक जोखिम में पढ़ाई नहीं होगी।"
प्रशासनिक हलचल: भवन पर लगाया ताला, अब 'माताजी के चबूतरे' पर चलेगी क्लास
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (CBEO) भींडर, राजेंद्र कुमार चौबीसा दल-बल के साथ नारदा पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया।
प्रशासन ने तुरंत निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
सीलिंग की कार्रवाई: एहतियात के तौर पर जर्जर विद्यालय भवन को पूरी तरह से सील कर ताला लगा दिया गया है।
वैकल्पिक व्यवस्था: बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब स्कूल का संचालन गांव में स्थित 'माताजी के चबूतरे' के पास एक सुरक्षित स्थान पर किया जाएगा।
जांच के आदेश: भवन की गुणवत्ता और विभाग स्तर पर हुई लापरवाही को लेकर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है।

