भारतीय पायलट स्मिथ माछार की बहादुरी: 34,000 फीट की ऊंचाई पर खौफनाक ड्रामा और विमान हादसे से बचाव की पूरी कहानी
दुबई से तेल अवीव आ रही 'फ्लाईदुबाई' (Flydubai) की फ्लाइट में 34,000 फीट की ऊंचाई पर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 185 यात्रियों से भरे विमान में ओमानी मूल के को-पायलट ने अचानक मानसिक संतुलन खो दिया और प्लेन को क्रैश कराने के इरादे से मुख्य कैप्टन—भारतीय मूल के स्मिथ माछार—पर धारदार चाकू से हमला कर दिया।
कैप्टन स्मिथ माछार लहूलुहान होकर कॉकपिट के दरवाजे के पास गिर पड़े, लेकिन बेहोश होने से ठीक पहले उन्होंने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए कॉकपिट का दरवाजा अंदर से अनलॉक कर दिया।
कॉकपिट का खौफनाक घटनाक्रम
अचानक हमला: को-पायलट ने अचानक चाकू निकालकर कैप्टन पर हमला कर दिया और प्लेन के कंट्रोल्स बिगाड़ दिए, जिससे प्लेन तेजी से नीचे की तरफ गोता लगाने लगा।
अंतिम क्षणों में सूझबूझ: गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ होने के बावजूद कैप्टन स्मिथ माछार ने अपनी बची हुई आखिरी ताकत लगाकर कॉकपिट का Lock खोल दिया।
यात्री का साहस: केबिन में अफरा-तफरी के बीच इजरायली यात्री यानीव और उनके साथी कॉकपिट की तरफ भागे। दरवाजा अनलॉक मिलते ही वे अंदर घुसे।
हमलावर पर काबू: यानीव ने हमलावर को-पायलट को दबोचकर बाहर किया और टीवी शो 'एयर क्रैश इन्वेस्टिगेशन' से सीखी तकनीक का इस्तेमाल कर प्लेन के कंट्रोल्स को पीछे खींचकर विमान को स्थिर किया।
कमान वापस संभालना: होश में आते ही लहूलुहान कैप्टन स्मिथ माछार ने गिरते-संभलते हुए दोबारा प्लेन का कंट्रोल अपने हाथों में लिया और सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात और प्रतिक्रिया
तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर यात्रियों का स्वागत करने पहुंचे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जब यात्री यानीव ने मुलाकात की, तो उन्होंने इस पूरी घटना का विवरण दिया।
नेतन्याहू की प्रतिक्रिया: भारतीय पायलट के इस साहसिक कदम को सुनकर पीएम नेतन्याहू कुछ पलों के लिए सन्न रह गए और इसे "चमत्कार" करार दिया। उन्होंने कहा कि बेहोश होने से पहले दरवाजा खोलने की कैप्टन की सूझबूझ की वजह से ही सबकी जान बच सकी।
यात्री को गले लगाया: यानीव की टी-शर्ट पर लगे खून के धब्बों को देखकर नेतन्याहू ने उन्हें गले लगाया और उन्हें "महान योद्धा" और "शेर" कहकर सम्मानित किया।
यह घटना भारतीय पायलट कैप्टन स्मिथ माछार के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित निर्णय क्षमता की एक मिसाल है, जिसकी बदौलत 185 यात्रियों की जान सुरक्षित बच सकी।

