मरीज तो तीन दिन पहले ही मर गया था, लेकिन डॉक्टर ज़िंदा बताकर वसूलते रहे पैसे

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     फिल्म 'गब्बर' में अस्पतालों और डॉक्टरों का पैसे बनाने वाला खेल तो देखा ही होगा। ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ में सामने आया है। यहां मरीज की मौत के बाद उसके इलाज के नाम पर अस्पताल ने परिजनों से डेढ़ लाख रुपए ऐंठ लिए।
      जावित्री अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद शिव विलास का ब्रेन डेड हो गया था। डॉक्टरों ने इसके बावजूद भी तीन दिन तक मरीज का शव इलाज के नाम पर वेंटिलेटर पर रखने का नाटक किया और परिजनों से मनमानी रकम वसूली।
     चालबाजी का खुलासा न हो लिहाजा डॉक्टरों ने परिजनों पर मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का दबाव बनाया, लेकिन परिजन राजी न हुए। प्रशासन ने उन्हें मनाने के लिए चार लाख रुपए देने का लालच भी दिया।
     परिजनों को जब इस बारे में शक हुआ तो उन्होंने पुलिस में इसकी जानकारी दी, जिसके बाद सच सामने आया। मरीज की मौत 21 जनवरी को ऑपरेशन के ही दिन ही हो गई थी। डॉक्टरोंने महज वेंटिलेटर पर मरीज (लाश) रखने का नाटक किया।
     परिवार वालों के यह बाद जानने के बाद देर रात तक अस्पताल के बाहर हंगामा हुआ। रायबरेली के लालगंज में पुरवा के रहने वाले शमशेर के पिता शिव विलास सिंह को प्रोस्टेट की दिक्कत थी। शमशेर ने बताया कि पिता को उन्होंने 18 जनवरी को जावित्री अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां तमाम प्रकार की जांच के बाद डॉक्टर ने 21 जनवरी को ऑपरेशन की तारीख तय की।
    ऑपरेशन के बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर बताया गया। 22 जनवरी को डॉक्टरों ने मरीज की हालत और भी नाजुक बताई है और हायर सेंटर शिफ्ट करने की बात बताई, जिसके अगले दिन डॉक्टरों ने मरीज को दूसरे अस्पताल शिफ्ट करने का दबाव बनाया।
     डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने से लेकर ऑपरेशन और वेंटिलेटर यूनिट की फीस के लिए परिजनों से करीब डेढ़ लाख रुपए वसूल किए। परिजनों के शिकायत करने पर प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
     UP के स्वास्‍थ्य राज्यमंत्री डॉ.एसपी यादव ने कहा कि इस मामले में जांच के लिए सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों की गलती पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रावाई होगी।
    सीएमओ एसएनएस यादव ने इस बाबत कहा कि जावित्री अस्पताल में मरीज की मौत के मामले की जानकारी नहीं मिली है। परिवा से पूरे मामले की जानकारी और शिकायत लेने के बाद जांच कराई जाएगी।
    ऑपरेशन केजीएमयू के सर्जन ने किया है तो कुलपति से भी मामले की जांच करा संबंधित डॉक्टर से पूछताछ होगी। जावित्री अस्पताल के संचालकों से भी जवाब तलब किया जाएगा।
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