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इसमें है कई खूबियां
इस टॉयलेट को लोको पायलट के काम के हिसाब से बनाया गया है.इस आधुनिक शौचालय में एक बार फ्लश के लिए केवल 250 मिलीलीटर पानी खर्च होगा. जबकि परंपरागत डिजाइन वाले शौचालय में एक बार फ्लश करने पर करीब 10 लीटर पानी खर्च होता है. वैक्यूम के साथ ही यह जैविक तकनीक पर आधारित है. इससे मानव अपशिष्ट रेल लाइन पर नहीं गिरेगा.
ये होगा फायदा
रेल इंजन में लगाए जाने वाले शौचालय आधुनिक हैं. शौचालय की गंदगी ट्रैक पर नहीं फैलेगी. ये रेल इंजन जून से पहले ट्रेनों में लग जाएंगे. इससे ट्रेन ड्राइवरों को बीमारी का बहाना बनाकर और झूठ बोलकर ट्रेन रुकवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. काफी समय से भारतीय रेलवे के लगभग 51 हजार ट्रेन ड्राइवर रेल इंजनों में शौचालय की मांग कर रहे थे.
सुरक्षा का ध्यान
इंजन जब तक चलता रहेगा तब तक शौचालय का दरवाजा नहीं खुलेगा. इसके रुकने और ब्रेक लगने पर ही दरवाजा खुलेगा. जब शौचालय का प्रयोग होगा तब इंजन आगे नहीं बढ़ पाएगा.
