'प्रभू' की कृपा से अब ट्रेन के इंजन में ही सू-सू कर सकेंगे ड्राइवर

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   नई दिल्ली।। रेल मंत्री सुरेश प्रभु के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है. देश में रेल चलने के बाद से लेकर अब तक ट्रेन के इंजन में ड्राईवर के लिए शौचालय नहीं होता था जिसकी मांग पिछले लंबे अरसे से चली आ रही थी. इस मांग को पूरा करते हुए रेल मंत्री ने बायो टॉयलेट लगे गुए रेल इंजन को हरी झंडी दिखाई है. भारतीय रेलवे में सेवा दे रहे 60 हजार से ज्यादा लोको पायलट के लिए ये किसी खुशखबरी से कम नहीं है. क्योकि अब उन्हे ड्यूटी के टाईम में नेचुरल कॉल पर परेशान नहीं होना पड़ेगा.
इसमें है कई खूबियां
     इस टॉयलेट को लोको पायलट के काम के हिसाब से बनाया गया है.इस आधुनिक शौचालय में एक बार फ्लश के लिए केवल 250 मिलीलीटर पानी खर्च होगा. जबकि परंपरागत डिजाइन वाले शौचालय में एक बार फ्लश करने पर करीब 10 लीटर पानी खर्च होता है. वैक्यूम के साथ ही यह जैविक तकनीक पर आधारित है. इससे मानव अपशिष्ट रेल लाइन पर नहीं गिरेगा.
ये होगा फायदा
     रेल इंजन में लगाए जाने वाले शौचालय आधुनिक हैं. शौचालय की गंदगी ट्रैक पर नहीं फैलेगी. ये रेल इंजन जून से पहले ट्रेनों में लग जाएंगे. इससे ट्रेन ड्राइवरों को बीमारी का बहाना बनाकर और झूठ बोलकर ट्रेन रुकवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. काफी समय से भारतीय रेलवे के लगभग 51 हजार ट्रेन ड्राइवर रेल इंजनों में शौचालय की मांग कर रहे थे.
सुरक्षा का ध्यान
    इंजन जब तक चलता रहेगा तब तक शौचालय का दरवाजा नहीं खुलेगा. इसके रुकने और ब्रेक लगने पर ही दरवाजा खुलेगा. जब शौचालय का प्रयोग होगा तब इंजन आगे नहीं बढ़ पाएगा.
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