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फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तमिलनाडु में पहले से ही यह प्रोजेक्ट चल रहा है जिसके तहत 6.3 मिलियन लीटर समुद्री पानी का शुद्धिकरण करके उन्हे कंडकुलम परमाणु प्लांट में इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, यह पानी पीने है लेकिन तब भी इसे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए अभी नहीं दिया जा रहा है। बीएआरसी के डायरेक्टर ने बताया कि हमने कई ऐसे मेंमब्रेन्स विकसित किए हैं जो अर्सेनिक या यूरेनियम से प्रदूषित हुए पानी को साफ कर उसे पीने लायक बना सकता है।
