आखिर "गीता" से क्यों भाग रहे हो "आप"

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गीता देखकर भाग क्यों जाते हैं केजरीवाल के विधायक!
     दिल्ली में इन दिनों नगर निगम चुनावों का शोर है। नेता गली-गली और दरवाजे-दरवाजे जाकर वोट मांग रहे हैं। हर किसी से मुस्कुराते हुए मिलने को तैयार हैं। लेकिन इस चुनावी माहौल में आम आदमी पार्टी के विधायक एक अजीब मुसीबत में फंसे हुए हैं। ये मुसीबत है गीता, हिंदुओं का पवित्र धर्मग्रंथ श्रीमदभगवत गीता। दरअसल कुछ लोग इन दिनों आम आदमी पार्टी के विधायकों को हिंदुओं की यह पवित्र पुस्तक तोहफे में देने की कोशिश कर रहे हैं और विधायक भागते फिर रहे हैं। उन्हें जैसे ही पता चलता है कि कोई गीता लेकर आया है वो अपना प्रोग्राम बदल देते हैं। गीता देने वाले कोई और नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के ही वो कार्यकर्ता हैं जो चंदे में गबन के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। इनमें से ज्यादातर वॉलेंटियर इंडिया अगेंस्ट करप्शन के शुरुआती दिनों से केजरीवाल के साथ जुड़े हुए हैं। लेकिन आम आदमी पार्टी बनने के बाद से इसके चंदे की लिस्ट वेबसाइट से हटा लिए जाने से नाराज हैं। इन वॉलेंटियर्स का आरोप है कि ईमानदारी की राजनीति के नाम पर दुनिया भर से लोग पैसे भेज रहे हैं, लेकिन अरविंद केजरीवाल और उनके कुछ करीबी लोग इन पैसों को अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। एनआरआई डॉक्टर मुनीष रायजादा की अगुवाई में ये कार्यकर्ता विधायकों के घर-घर जाकर उन्हें गीता तोहफे में देने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वो सच्चाई के रास्ते पर चलें। इस अभियान को गीता ज्ञापन नाम दिया गया है।
आप विधायकों से अपील
     आंदोलन के तहत आम आदमी पार्टी के ये नाराज कार्यकर्ता विधायकों से अपील कर रहे हैं कि वो केजरीवाल पर चंदे की लिस्ट जारी करने के लिए दबाव बनाएं। अपनी ही पार्टी के साथियों की बात सुनने के बजाय विधायक मौके से भाग जाते हैं। अभियान के लोग अब तक आम आदमी पार्टी के लगभग सभी विधायकों और मंत्रियों के घर जा चुके हैं। ये लोग बहुत शांतिपूर्ण तरीके से जाते हैं और उन्हें तोहफे में गीता देने की कोशिश करते हैं। लेकिन अब तक केजरीवाल की पार्टी का एक भी विधायक इनसे मिलने का वक्त नहीं निकाल सका। कई जगह तो गीता ज्ञापन की टीम के पहुंचने से पहले ही घरों और दफ्तरों पर ताले लगवा दिए गए। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गीता लेने के नाम पर आप नेताओं के हाथ-पांव क्यों फूल जा रहे हैं। आप के नाराज कार्यकर्ताओं की इसी टीम ने काफी समय से चंदा बंद अभियान भी चला रखा है। इसके तहत वो घूम-घूमकर लोगों से अपील करते हैं कि वो आम आदमी पार्टी को तब तक चंदा न दें, जब तक पार्टी चंदे की लिस्ट वेबसाइट पर जारी न कर दे। इसी अभियान का नतीजा था कि दिल्ली में एमसीडी चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी के पास फंड का अकाल हो गया। कई लोग जो अब तक अरविंद केजरीवाल पर भरोसा करके चंदा भेज रहे थे उन्होंने भी अब चंदे का हिसाब मांगना शुरू कर दिया है।
‘गीता’ से डरे केजरीवाल
    नो लिस्ट, नो डोनेशन टीम के सदस्य मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने की भी कोशिश कर चुके हैं। इसी साल फरवरी में टीम ने मुख्यमंत्री आवास पर जाकर केजरीवाल को तोहफे में गीता देने का एलान किया था। सदस्यों ने उनके घर जाकर गीता भेंट भी की, लेकिन केजरीवाल ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। उस वक्त टीम के सदस्य पंजाब चुनाव में 21 अपराधी किस्म के लोगों को टिकट दिए जाने पर सांकेतिक नाराजगी जताने के लिए गए थे। चंदा बंद अभियान के संयोजक मुनीष रायजादा और दो अन्य कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री आवास के अंदर जाने की इजाज़त भी दी गई थी। उस वक्त सीएम केजरीवाल आवास में ही मौजूद थे। उन्होंने मुनीष रायजादा और दोनों साथियों को कई घंटे इंतजार कराया और तोहफे में गीता लेने से इनकार कर दिया। रायजादा का कहना था कि हम केजरीवाल को गीता में लिखे ‘कर्म’ के संदेश का अहसास दिलाना चाहते हैं, लेकिन लगता है वो मानसिक तौर पर इसके लिए तैयार नहीं हैं। हैरानी की बात ये है कि मुनीष रायजादा और इस अभियान से जुड़े तमाम लोग कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी रहे हैं। अमेरिका में प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर मुनीष रायजादा ने तो कामकाज छोड़कर आम आदमी पार्टी के लिए फंड इकट्ठा करने का काम किया था, लेकिन अब केजरीवाल और उनके विधायक इन्हें पहचानने से भी इनकार करते हैं।

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