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बाज़ार में लूट चरम पर, जीएसटी जोड़ रहे पर नहीं दे रहे बिल

सुहागिनों को भायी सिफान-सिल्फ की साड़ियां, दुकानों पर बड़ी भीड़
    फर्रुखाबाद/कायमगंज।। स्नेह, आस्था और समर्पण के पर्व करवाचौथ के लिए पूरा बाजार खरीदारी के रंग में रंग गया। नव विवाहिताओं ने भी पहले करवाचौथ के लिए उल्लास के साथ खरीददारी की। पूजन सामग्री के साथ ही मेहंदी व श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर पूरे दिन रौनक छायी रही। वहीं दूकानदार साड़ियों व कपड़ों की खरीद पर जीएसटी तो लगा रहे हैं पर उपभोक्ताओं को बिल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। जागरूक उपभोक्ताओं को कहना है कि जब दूकानदार जीएसटी के रूपए जोड़ते हैं तो उन्हें बिल भी देना चाहिए। पर जीएसटी विभाग की लापरवाही के चलते दुकानदार उपभोक्ताओं को पक्का बिल भी उपलब्ध नहीं करा रहेे हैं।
      शनिवार को होने वाले अखंड सौभाग्य के व्रत करवाचौथ की तैयारी की फुहारें घरों से निकलकर गुरुवार को बाजार तक बरसीं। दोपहर से ही बाजार इस पर्व के लिए खरीददारी के आगोश में डूब गया। कई महिलाएं समूह में खरीददारी को निकलीं। सामान कोई भी हो मिल-जुलकर पसंद किया। फर्रूखाबाद के नेहरू रोड तो कायमगंज के बजरिया मार्केट पर कपड़े की दुकानों पर खासी भीड़ रही। व्रत के दिन पहनने के लिए खास साड़ी पसंद की जाती रही। लाल रंग की साड़ी का विशेष क्रेज रहा। सिफान, सिल्क वार्डर, प्लेन वार्डर, कांजीवरम सिल्क व लीनेन काटन साड़ी विशेष रूप से पसंद की जा रही है। सिफान, सिल्क, प्रिट व प्लेन वार्डन साड़ियां 600 से 2500 रुपये तक बिक रही हैं। बाजार में रेडीमेड ज्वैलरी की भी खरीद की जा रही। बिछिया, पायल, नथ जैसी ज्वैलरी की मांग खूब हो रही है। साड़ी व ज्वैलरी के साथ चलनी, मेहंदी व सुहाग का अन्य सामान खरीदा जा रहा है। चौक, सेठगली, रेलवे रोड व स्टेट बैंक गली आदि की दुकानों पर करवाचौथ का सामान खरीदा गया। मिट्टी के करवा व सींक की भी बिक्री करवाचौथ व्रत पूजन के लिए मिट्टी का करवा, सकोरा, सींक, चूड़ा, बतासा आदि की भी खरीद की गई। पूजन के लिए कलेंडर व पूजन विधि की किताब भी खरीदी। कई दूकानों पर उपभोक्ताओं द्वारा बिल मांगे जाने पर ननुकुर हुई तो दुकानदारों ने कम्प्यूटर न लगे होने या यह कहकर उपभोक्ताओं को टरका दिया कि यदि आप बिल लेंगे तो जीएसटी के रूपए आपको अतिरिक्त देने पडेंगे। वहीं जागरूक उपभोक्ताओं का कहना है कि व्यापारी उपभोक्ताओं से जीएसटी के बहाने अतिरिक्त रूपए उपभोक्ताओं से वसूल रहे हैं और सरकार के राजस्व की भी चोरी कर रहे हैं। यह सब कार्य वहीं जीएसटी विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ और निरशता के चलते कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की है कि उपभोक्ताओं को कपड़ा व बर्तन व्यवसाइयों के यहां से पक्के बिल उपलब्ध कराएं जाएं।

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