सैकड़ों लोगो की ज़िन्दगी बचाने वाला, आज भी है सहयोग का मोहताज़

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    1650 लोगों को जीवन दान देने वाले गोताखोर प्रगट सिंह जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं लेकिन 275 बार सम्मानित करने वाला प्रशासन आंख कान बंद करके बैठा हुआ है। ज्ञात रहे कि कुरुक्षेत्र के दबखेड़ी गांव में पैदा होने वाले प्रगट सिंह अब तक 11,801 लाश, 1650 जिंदा लोगों और 8 खूंखार मगरमच्छों को निकाल चुका है। लेकिन गोताखोर प्रगट सिंह पिछले कई दिनो से लगातार जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।
     275 बार सम्मानित करने वाले प्रशासन के द्वारा उनका हालचाल तक ना पूछना बेहद शर्मनाक मामला है मात्र 31 साल के प्रगट सिंह खेतों में भैंस चराने का काम करते हैं। उनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है। उनके पास तीन बेटियां हैं एक बेटी मात्र 9 महीने की, दूसरी 4 साल और तीसरी बेटी साढे 5 साल की हैं। बावजूद इसके वह अपनी जान पर खेलकर लोगों की जिंदगियां बचाने की कोशिश करते रहते हैं।
     कई कई दिनों तक सड़ी गली लाशों को निकालने में भी परगट सिंह गुरेज नहीं करते ।समाज के प्रति ऐसी सच्ची लग्न के कारण वह लगातार अपनी जान को जोखिम में डालते हैं। केवल प्रशस्ति पत्रों से उनके परिवार का लालन पालन नहीं हो सकता। सरकार को चाहिए कि ऐसे निस्वार्थ समाजसेवी के लिए एक कदम आगे बढ़कर उन्हें रोजगार मुहैया कराना चाहिए ताकि उनके परिवार की कम से कम आर्थिक मदद हो पाए।

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