फर्जी डिग्री वाले सैकड़ों मास्टरजी की बर्खास्तगी के आदेश जारी, दर्ज होगी FIR

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    प्रयागराज/उत्तर प्रदेश।। सरकारी नौकरी का नशा ही कुछ ऐसा है की हर कोई इसे कैसे भी करके पाना चाहता है भले ही इसे पाने के लिए किसी को फ़र्ज़ी डिग्री ही क्यों ना खरीदनी पड़े लेकिन जब ऐसे फ़र्ज़ी डिग्रीधारी सरकारी नौकरी करते हुए पकडे जाते है तो उनकी शामत आना तय समझो जी हां उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में फर्जीवाड़े के जरिए नौकरी पाने वाले 812 शिक्षकों पर नौकरी से बर्खास्तगी की गाज़ गिरी हैं। ऐसे फ़र्ज़ी डिग्री धारियों के लिए सरकार ने बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए है। 
   जानकारी अनुसार उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से आए आदेश के आधार पर ऐसे लोगो के बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं। इतना ही नहीं बर्खास्त होने वाले इन सभी फर्जी टीचर्स के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
फर्जी डिग्री से हासिल की नौकरी
    साल 2005 में यूपी के प्राइमरी स्कूलों में हो रही शिक्षकों की भर्ती में आगरा की डॉ. भीमराव अम्बेडकर यूनिवर्सिटी की बीएड की फर्जी डिग्री लगाकर तमाम लोगों ने नौकरी हासिल कर ली थी और ये लोग टीचर बन गए थे। बाद में ये मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था। एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में SIT जांच के आदेश दिए थे। एसआईटी जांच में न सिर्फ फर्जीवाड़े के आरोप सही साबित हुए बल्कि सरकार से इनकी बर्खास्तगी की भी सिफारिश की गई।
डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के फैसले को सही माना
    सरकार ने इनकी बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू की तो कार्रवाई की जद में आने वालों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद इस फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई। चार दिन पहले 26 फरवरी को आए डिवीजन बेंच ने भी एकल पीठ के फैसले को सही माना था।
फर्जी शिक्षकों पर दर्ज होगी FIR
    हाईकोर्ट के इसी आदेश के आधार पर बेसिक शिक्षा परिषद ने इन सभी की बर्खास्तगी के आदेश जारी किए हैं। इतना ही नहीं सभी बीएसए से ये भी कहा गया है कि वो इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराएं। हालांकि, इनको दिए गए वेतन और भत्तों की रिकवरी इनसे की जाएगी या नहीं, ये अभी तय नहीं है।

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