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थानाधिकारी फरार, मौके से रिश्वत लेते कांस्टेबल गिरफ्तार

बांसवाड़ा एसीबी ब्यूरो टीम की कारवाई से मचा हडकंप
   मोहकमपुरा/कुशलगढ़/बाँसवाड़ा/राजस्थान।। कोरोना की वजह से पुरे देश में लॉकडाउन कई समय से जारी है, जिसमे अवैध वाहनों की धरपकड़ के साथ लोगो की भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए चालान की मार भी कई समय देश की जनता भुगत रही है। ऐसे में राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के सुदूरवर्ती एमपी की सीमा से लगे हुए जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में रिश्वत लेने के मामले भी सामने आ रहे है। देश में जहा होनहार युवाओं के तेज़ी से बढ़ती बेरोजगारी के चलते जहा उन्हें बेगारी की बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। वही सरकार में बैठे मोटी तनख्वाह लेने वालों को भी अब दो नंबर की रिश्वत लेने की खुमारी छाई हुई है। 
   आपको बता दे की राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के सुदूरवर्ती एमपी की सीमा से लगे हुए जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के पुलिस थाना, पाटन में सोमवार को एसीबी टीम ब्यूरो बांसवाड़ा ने ट्रेप की कारवाई को अंजाम देते हुए एक पुलिस कांस्टेबल को रंगे हाथों थाना परिसर में ही दबोच लिया। जबकि कांस्टेबल के मार्फत रिश्वत की रकम लेने वाला आरोपी थानाधिकारी सुभाष परमार मौके से भनक लगते ही फरार हो गया, जिसकी तलाश में एसीबी टीम फिलहाल जुटी है।
   जानकारी अनुसार कारवाई सत्यापन के तीन रोज के भीतर ही एसीबी टीम ब्यूरो बांसवाड़ा के एडीशनल एसपी माधोसिंह के नेतृत्व में की गई। जहां ब्यूरो टीम ने पाटन थाना क्षेत्र के गांव वडला की रेल निवासी परिवादी पिता एवं पुत्र की लिखित रिपोर्ट और सत्यापन के बाद ट्रेक की बिसात को अमलीजामा पहनाया गया।
क्या था मामला?
    ब्यूरो को परिवादी वडला की रेल निवासी भीमा पिता नरसिंग मसार और उसके बेटे जीवणा पिता भीमा ने लिखित परिवाद एसीबी ब्यूरो बांसवाड़ा को 4 जून 2012 को देकर बताया कि उसके लड़के जीवणा सहित अन्य के खिलाफ लालपुरा थाना, बाजना, जिला रतलाम मध्यप्रदेश निवासी फुलिया ने उसकी लड़की वसु को जबरन अपहरण कर ले जाने और नातरा शादी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिस पर गत 18 मई को आरोपी कांस्टेबल लालशंकर उनके घर आया तथा दोनों परिवादी पिता पुत्र को बिठाकर थाने लाया, जहां रिपोर्ट कर्ता फुलजी से सामाजिक रीति रिवाज पंचों के माध्यम से आपसी राजीनामा हो गया। वही उक्त राजीनामे की कॉपी भी थाने में सूचनार्थ दे दी गई। बावजूद इसके आरोपी कांस्टेबल ने उनके खिलाफ दी गई रिपोर्ट पर कारवाई नहीं करने की एवज में स्वयं के लिए 10,000 रुपये और आरोपी थानाधिकारी सुभाष परमार के लिए 25,000 रूपये की मांग की जिसमे से दस हजार रुपए उसी दिन कांस्टेबल ने ले भी लिए। परिवादी ने बताया की अन्य आरोपी सुभाष की रिश्वत की बकाया राशि को बाद में देने की बात कही गई। 
    वही लगातार चल रहे लॉकडाउन और गरीबी की मार के चलते परिवादी के थानाधिकारी को रिश्वत देने की राशि की व्यवस्था नहीं होने पर आरोपी कांस्टेबल 1 जून को उसके घर वडला की रेल आ धमका तथा थानाधिकारी सुभाष की तय रिश्वत राशि की मांग करने लगा। आखिरकार परिवादी ने परेशान और प्रताड़ित होकर एसीबी ब्यूरो बांसवाड़ा को गत 4 जून को लिखित परिवाद दिया तथा इसी दिन थानाधिकारी के लिए 10,000 की रिश्वत राशि परिवादी लेकर टीम ने सत्यापन कराया जिसमें आरोपी थानाधिकारी सुभाष ने भी परिवादी से राशि की कितनी व्यवस्था होने और पूरी बकाया राशि देने के लिए डराया धमकाया गया। जहां परिवादी ने फिलहाल दस हजार की व्यवस्था होने की बात कही गई। उक्त राशि भी आरोपी सुभाष ने स्वयं नहीं लेकर आरोपी कांस्टेबल लालशंकर को देने का बोला जिस पर परिवादी ने राशि आरोपी कांस्टेबल को दी गई। चूँकि मामला अब एसीबी की निगरानी में था इसलिए एसीबी ने भी अपनी पैनी निगाह जमाते हुए उसका सत्यापन किया। 
    इसी दिन थानाधिकारी सुभाष के लिए दस हजार रिश्वत राशि लेने के बाद आरोपी कांस्टेबल ने रिश्वत राशि कम करते हूए 5,000 में ही मामला निपटाने की बात भी कही जिस पर टीम ने सत्यापन के तीन दिन बाद यानी की सोमवार को 5,000 रिश्वत राशि लेकर दोनों परिवादी पिता पुत्र को पाटन थाने भेजा जहां आरोपी कांस्टेबल लालशंकर (849) ने रिश्वत राशि थाने में ही लेने के दौरान ही इशारा पाते ही सादी ड्रेस में एसीबी टीम के जवानों ने आरोपी कांस्टेबल को धर दबोचा। 
परिवादी क्यों पहुंचा एसीबी के पास 
    एसीबी टीम की अचानक हुई इस कारवाही से भनक लगते ही आरोपी कांस्टेबल के मार्फत रिश्वत लेने वाला आरोपी पाटन थानाधिकारी सुभाष फरार हो गया जिसको एसीबी ब्यूरो टीम फिलहाल तलाश रही है। टीम एसीबी ब्यूरो बांसवाड़ा एडीशनल एसपी माधोसिंह के नेतृत्व में राजकुमार, योगेंद्र सिंह, राजेश कुमार, रतनसिंह, जितेंद्र सिंह, माजिंद खां ब्यूरो टीम शामिल रही। 
    इस बारे में एसीबी ब्यूरो एडीशनल एसपी सिंह ने बताया कि आरोपी थानाधिकारी ने कांस्टेबल के मार्फत रिश्वत लेना पाया गया टीम की भनक लगते ही आरोपी एस एच ओ फरार हो गया जिसकी टीम तलाश कर रही है वही आगे की जांच जारी है। दूसरी और परिवादी पिता पुत्र ने बताया कि उनका रिपोर्ट कर्ता परिवार से सामाजिक रीति रिवाज से पंचों के माध्यम से लिखित राजीनामा ढाई लाख में तय होकर कॉपी थाने में देने के बावजूद कारवाई में फंसा देने और कारवाई नहीं करने की एवज में कुल 35,000 रिश्वत राशि मांगी गई जिसमें से दस हजार रूपये आरोपी कांस्टेबल ने अपने लिए और पच्चीस हजार रूपये आरोपी थानाधिकारी को देने के लिए उसे बहुत परेशान किया गया। इस पर मजबूरन उन्होंने एसीबी की शरण ली। 
    बता दें कि पाटन थाना इलाका पूरी तरह नान कमांड होकर एक फसल पर निर्भर है। आये दिन होने वाली घटना, दुर्घटना और रिपोर्ट पर अमूमन मामले दर्ज नहीं होकर पंचों के माध्यम से आपसी राजीनामे हो जाते हैं। इसके बावजूद यहां परिवादी और आरोपी से डरा धमकाकर बड़ी रिश्वत राशि लेने का रिवाज प्रचलन में है। थानाधिकारी सुभाष के आने के बाद यहां रिश्वत की डिमांड और बढ़ गई थी। 
   सूत्रो और जागरूक मौतबिरो ने यह भी बताया कि थाने में रिपोर्ट लेकर आने वाले हर पिडित और परिवादी से पहले दौ सौ से, पांच सौ रुपए लिए जाते हैं तथा कई दिनों तक रोजनामचे तक में रिपोर्ट दर्ज नहीं होकर पुलिस गिरी के नाम पर गरीब लोगों को डरा धमकाकर रिश्वत ली जाती है।




(Mohit Singh)

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