विश्व आदिवासी दिवस पर लिया प्रण मतभेदों को भुलाकर समाज को किया जाएगा सशक्त ओर सुदृढ़

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विश्व आदिवासी दिवस पर लिया प्रण मतभेदों को भुलाकर समाज को किया जाएगा सशक्त ओर सुदृढ़

जनजाति क्षेत्र मे मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस 
विश्व आदिवासी दिवस पर वक्ताओ ने कहा अब देश और समाज को आगे लाने का आ गया है समय
  बांसवाड़ा/राजस्थान।। विश्व आदिवासी दिवस पर 9 अगस्त को बांसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ एवं कुशलगढ़ ब्लॉक के हजारों आदिवासियों ने बांसवाड़ा जिले की सर्वोच्च पर्वत श्रृंखला आदिवासियों के मुख्य आराध्य देव बाबा कसोमोर बावसी के पावन प्रांगण में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन किया। आपको बता दे की यह पर्वत शिखर ग्रामीण अंचलों के जनजाति वर्ग के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मतभेदों को भुलाकर समाज को सशक्त ओर सुदृढ़ किया जाएगा 
  इस आयोजन की खासियत यह रही कि हजारों की तादाद में आदिवासी धार्मिक एवं राजनीतिक विचारधारा को एक तरफ करके सामाजिक सरोकार को सर्वोपरि मानते हुए सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाकर समाज को सशक्त, सुदृढ़ और शिक्षा में अग्रणी करने के लिए भूमिका निभाई है। वही इस अवसर पर जनजाति वर्ग के भिन्न-भिन्न सम्मानित व्यक्तियों ने जनसभा को संबोधित भी किया। 
समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने पर किया जाएगा फोकस 
  जनसभा में विभिन्न कलाकारों ने लोकगीतों के मार्फत समाज की एकता एवं समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने पर फोकस किया। कसोमोर बावसी के कार्यक्रम में टिमेडा बड़ा सरपंच रमणलाल राणा, पूर्व सरपंच सारण जगमाल सिंह मचार, प्रधानाचार्य भीम जी सुरावत, समाजसेवी व्याख्याता मांगीलाल वसुनिया, प्रधानाध्यापक मुकेश बारिया, कल्याण सिंह डामोर, अश्विन डामोर, मुकेश पटेल, सेवानिवृत्त पटवारी कालू सिंह गरासिया, विजय सिंह मईड़ा, जेल प्रहरी उमेश निनामा एवं कई वक्ताओं एवं कलाकारों ने इस अवसर पर अपना उद्बोधन दिया एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतिया पेश की। जानकारी अनुसार करीब चार हजार से अधिक लोग विश्व आदिवासी दिवस पर कसोमर बावसी के दर पर पहुंचे थे। 
Vishv Aadiwasi Diwas
 बता दे की राजस्थान के वागड क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध बांसवाड़ा जिले मे मंगलवार को विश्व आदिवासी दिवस बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कुशलगढ उपखंड के सुदूर घाटा क्षेत्र मे भी विश्व आदिवासी दिवस को लेकर भव्य आयोजन हुए। 
राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के बैनर तले हुआ आयोजन 
  वागड़ क्षेत्र का प्रमुख कार्यक्रम समारोह राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद के बैनर तले मूल निवासी संगठन द्वारा किया गया, जिसमे विभिन्न सामाजिक संगठनो के संयुक्त तत्वावधान के कार्यक्रम मे हजारो की तादात मे जनजाति समाज बंधु सम्मिलित हुए।
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नौजवानो ने पारंपरिक परिधान में लिया भाग 
  जानकारी अनुसार कार्यक्रम में महिला, पुरुष, बूढे, बच्चे और नौजवानो ने पारंपरिक परिधान पहन कर भाग लिया। सुबह से ही आयोजन को लेकर कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर एकजुट होने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह नौ बजे हनुमानजी मंदिर मोहमकमपुरा से टैक्टर मे बाबा साहेब, बिरसा मुंडा और टांटिया भील के चित्र से सुसज्जीत झांकी और शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में जनजातीय वर्ग की खासी भीड़ जुटी इस वजह से मौके पर जाम लगने जैसी स्थिति भी देखी गयी। 
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आजादी दिलाने मे भील जनजाति समुदाय का है विशेष महत्व 
  जिले के आमलीपाडा स्कुल मे आयोजित कार्यक्रम मे क्षेत्र के समाजसेवी जिथिंग भाई डामोर सहित कई वक्ताओ ने कहा कि देश को आजादी दिलाने मे भील जनजाति समुदाय का अपना एक अलग ही विशेष महत्व है, जो कि इतिहास के कुछ पन्नो तक वामपंथियों द्वारा सीमित कर दिया गया है। आज युवा पीढी पढ-लिखकर बहुत आगे पहुंच चुकी है, जिसका नतिजा है कि आज हर गांव मे कोई ना कोई सरकारी कर्मचारी देखने को आसानी से मिल जाता है। अब समय बदलाव का है, जो समाज को स्वीकार करना पडेगा और देश और समाज को मुख्यधारा मे लाने के सतत प्रयास करने होगे। 
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9 अगस्त 1982 को आयोजित हुई थी पहली बैठक 
  मूल आदिवासी संघ के थावरचंद भूरिया ने कहा कि यू.एन.ओ. द्वारा आदिवासियो की संस्कृति और सभ्यता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए 9 अगस्त 1982 को पहली बैठक आयोजित हुई थी। इसके बाद विश्व आदिवासी दिवस पर राजकीय अवकाश राजस्थान सहित अन्य प्रदेशो मे घोषित हुआ।
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समाज हित मे कार्यकर्ता एक आवाज पर करेंगे काम 
  कार्यक्रम में वक्ताओ ने कहा कि जनजाति समाज को पिछडा मानकर अब तक जो अत्याचार हुए और हो रहे है उनको समाज कभी बर्दाश्त नही करेगा। समाज हित मे कार्यकर्ता एक आवाज पर काम करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत में समाज के मसीहाओ के चित्र पर पुष्प अर्पित भी किए गये।
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  इस दौरान मंच पर सातलिया सरपंच चौखां देवी, मोहकमपुरा सुश्री सुशीला हिंगाड, सादर भाई, बापु चारेल, रामा भाई, झीथरा भाई, जगदीश डिंडोर, विपिन वडखिया, रामा भाई सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और समाजबंधू शामिल हुए। 
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  कार्यक्रम का संचालन मूल निवासी संघ के दिनेश भूरिया ने किया एवं आभार मूल निवासी संघ के नारायण सिंगाड ने व्यक्त किया। कार्यक्रम मे आदिवासी गैर नृत्य की भी धुम रही। वही कार्यक्रम के पश्चात सामूहिक भोजन का भी आयोजन किया गया। 

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