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राजस्थान में झूठी FIR पर 'कानूनी स्ट्राइक': 75 को सजा, 1,800 से ज्यादा रडार पर; DGP की साफ चेतावनी

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राजस्थान पुलिस का महा-एक्शन: झूठी FIR दर्ज कराने वाले 75 'साजिशकर्ता' पहुँचे जेल, 1870 पर चलेगा केस

जयपुर/राजस्थान राजस्थान में अब निजी दुश्मनी निकालने, जमीन विवाद या पैसों के लेन-देन में किसी निर्दोष को फंसाने के लिए झूठी FIR दर्ज कराना भारी पड़ गया है। पुलिस को गुमराह करने और कानून का मज़ाक उड़ाने वाले समाजकंटकों के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने कोर्ट के माध्यम से एक बड़ा विधिक अभियान छेड़ रखा है।

महानिदेशक पुलिस (DGP) राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशानुसार चलाई जा रही इस मुहिम के तहत केवल जून महीने (1 जून से 28 जून 2026) के भीतर ही अदालत ने 75 दोषियों को जेल और जुर्माने की सजा सुनाई है।

DGP Rajiv Kumar Sharmaa


1,870 मामलों पर कोर्ट का संज्ञान, अब खैर नहीं!

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) बिपिन कुमार पांडे ने बताया कि पुलिस की मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते प्रदेश भर की अदालतों ने 1,870 ऐसे मामलों पर संज्ञान (Cognizance) लिया है, जिनमें शिकायतें झूठी पाई गईं। अब इन सभी आरोपियों पर बकायदा अदालत में केस चलाया जाएगा और इन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला? अक्सर देखा जाता है कि लोग आपसी रंजिश के कारण बलात्कार, लूट या डकैती जैसे गंभीर मामलों की झूठी कहानी गढ़ देते हैं। इससे न केवल पुलिस का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि उन वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है जिन्हें पुलिस की सबसे ज्यादा जरूरत है।

कार्रवाई में 'नागौर' अव्वल, 'हनुमानगढ़' ने सजा दिलाने में रचा रिकॉर्ड

जब पुलिस अपनी तफ्तीश में किसी मामले को पूरी तरह झूठा पाती है, तो वह कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट (FR) पेश करती है। इस अभियान में राजस्थान के अलग-अलग जिलों ने बेहतरीन काम किया है:

  • नए मामलों में संज्ञान (Top 3 जिले): झूठी कहानियां रचने वालों को कोर्ट के कटघरे में खड़ा करने में नागौर जिला पूरे प्रदेश में नंबर-1 रहा, जहाँ अकेले जून में 292 नए मामलों पर कोर्ट ने संज्ञान लिया। इसके बाद जयपुर ग्रामीण (247) दूसरे और अलवर (212) तीसरे स्थान पर रहा।

  • सजा दिलाने में हनुमानगढ़ आगे: तथ्य छुपाकर पुलिस को गुमराह करने वालों को सजा दिलाने में हनुमानगढ़ पुलिस ने रिकॉर्ड 18 मामलों में दोषियों को कोर्ट से सजा व जुर्माना मुकर्रर कराया। वहीं प्रतापगढ़ पुलिस की सटीक पैरवी से 9 मामलों में दोषियों को सजा मिली।

इन जिलों में भी कसा कानूनी शिकंजा (सजा के मामले):

जयपुर ग्रामीण (6), कोटा शहर (5), अलवर, बांसवाड़ा व ब्यावर (4-4), सवाई माधोपुर (3), जयपुर दक्षिण, धौलपुर, झुंझुनू, डूंगरपुर, सिरोही, झालावाड़ और भीलवाड़ा (2-2) तथा बीकानेर, चूरू और जीआरपी अजमेर में 1-1 मामले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है।

पुलिस मुख्यालय की दो टूक चेतावनी

राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जो कोई भी व्यक्ति झूठे साक्ष्य गढ़ेगा या किसी बेकसूर को फंसाने के लिए झूठी एफआईआर कराएगा, उसके खिलाफ कोर्ट के माध्यम से त्वरित ट्रायल (Fast-track Trial) कराया जाएगा। कानून की आंखों में धूल झोंकने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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