Manoj Munot : करोड़ो के दिखावे से तौबा! बेटी की शादी का बजट बचाकर व्यापारी ने 90 बेघर परिवारों को दिए पक्के मकान

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शादी के दिखावे पर करारा प्रहार: बेटी के विवाह का बजट बचाकर व्यापारी ने 90 बेघर परिवारों को दिए पक्के मकान, बनी अमर मिसाल

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद): आज के दौर में जहां शादियों में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर कुछ ही घंटों का तमाशा और दिखावा करना आम बात हो गई है, वहीं महाराष्ट्र के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) के जाने-माने व्यापारी मनोज मुनोत (अजय मुनोत) ने समाज के सामने इंसानियत और नेकनीयती की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी बेटी श्रेया की शादी के फिजूलखर्च को रोककर उसी बजट से दर्जनों बेसहारा परिवारों की पूरी ज़िंदगी संवार दी।

सच्ची दौलत, सच्ची इंसानियत: औरंगाबाद के व्यापारी की ऐतिहासिक पहल, बेटी के विवाह में 90 जरूरतमंदों को सौंपी उनके सपनों के घर की चाबियां

शादी के फिजूलखर्च से रचा इतिहास व्यापारी मनोज मुनोत ने अपनी बेटी की शादी में भव्य तमाशे और गैर-ज़रूरी सजावट पर पैसे बर्बाद करने के बजाय 90 बेघर और जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के मकान बनवाए। शादी के शुभ अवसर पर इन सभी गरीब परिवारों को उनके अपने घर की चाबियां सौंपी गईं। एक पक्का मकान किसी बेसहारा परिवार के लिए सिर्फ चार दीवारें नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों का पक्का सहारा होता है।

बेटी श्रेया के लिए जीवन का सबसे अनमोल उपहार इस ऐतिहासिक फैसले में उनकी बेटी श्रेया और पूरे परिवार ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। दुल्हन श्रेया ने 90 बेघर परिवारों के चेहरों पर झलकी खुशी और उनकी निश्छल दुआओं को अपने जीवन का सबसे बड़ा और अनमोल 'वेडिंग गिफ्ट' माना।

समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश हर परिवार अपनी हैसियत के हिसाब से शादी का आयोजन करता है, लेकिन अपनी ज़िंदगी के सबसे खास दिन पर समाज के सबसे कमजोर वर्ग के सिर पर पक्की छत देना एक ऐसा पुण्य है जिसकी कोई कीमत नहीं हो सकती। असल दौलत वह नहीं जो सिर्फ अपने ऐशो-आराम पर खर्च हो, बल्कि वह है जो किसी मजबूर के आंसुओं को मुस्कान में बदल दे। मनोज मुनोत जी की यह नेक सोच, दरियादिली और संस्कार आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं।

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