बेल्जियम के युवा जीनियस लॉरेंट सिमंस (Laurent Simons) ने अपनी असाधारण प्रतिभा से पूरी दुनिया में एक बार फिर इतिहास रच दिया है। महज 15 साल की उम्र में यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प से क्वांटम फिजिक्स में PhD पूरी करने वाले लॉरेंट को दुनिया 'लिटिल आइंस्टीन' के नाम से जानती है।
शिक्षा और उपलब्धियों का सफर
लॉरेंट की शैक्षणिक यात्रा किसी अचंभे से कम नहीं है। उनकी कम उम्र में बड़ी डिग्रियां हासिल करने का सिलसिला बेहद प्रेरणादायक रहा है:
11 वर्ष की आयु: फिजिक्स में बैचलर डिग्री पूरी की।
12 वर्ष की आयु: क्वांटम फिजिक्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
15 वर्ष की आयु: यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प से क्वांटम फिजिक्स में PhD पूरी की। उनकी रिसर्च का विषय 'सुपरफ्लुइड्स और सुपरसॉलिड्स में बोस पोलारॉन्स' (Bose polarons in superfluids and supersolids) था।
अब 16 वर्ष की उम्र में: वह मेडिकल साइंस में अपनी दूसरी डॉक्टरेट (PhD) कर रहे हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फिजिक्स और मेडिसिन के अंतर्संबंधों पर फोकस किया जा रहा है।
विज्ञान के जरिए इंसानियत की सेवा का सपना
बचपन से ही लॉरेंट का मुख्य लक्ष्य इंसानी जिंदगी को बेहतर और लंबा बनाने के लिए विज्ञान का उपयोग करना रहा है। उन्होंने कृत्रिम अंग (Artificial Organs) विकसित करने और अपने दादा-दादी की तरह दिल की बीमारियों से जूझ रहे अनगिनत मरीजों की जान बचाने का सपना देखा है। वह तकनीक और चिकित्सा के मेल से स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाना चाहते हैं।
"विज्ञान का असली मकसद मानवता की सेवा करना और जीवन की गुणवत्ता को सुधारना होना चाहिए।" — लॉरेंट सिमंस

