बांसवाड़ा के कुशलगढ़ का आध्यात्मिक वैभव: महाभारत कालीन '64 जोगनिया सरोना धाम' और 'वागड़ के पावागढ़' माँ नंदिनी के दर्शन
राजस्थान का वागड़ अंचल अपनी ऐतिहासिक विरासत, लोक संस्कृति और चमत्कारी धार्मिक स्थलों के लिए देश-विदेश में अपनी एक अलग पहचान रखता है। बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ क्षेत्र में ऐसे दो प्रमुख आस्था केंद्र मौजूद हैं, जो न सिर्फ पौराणिक इतिहास समेटे हुए हैं, बल्कि प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम भी पेश करते हैं—64 जोगनिया सरोना धाम और माँ नंदिनी माता मंदिर (वागड़ का पावागढ़)।
1. 64 जोगनिया सरोना धाम: महाभारत कालीन इतिहास और असीम आस्था का केंद्र
बांसवाड़ा के कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाटन क्षेत्र के समीप स्थित सरोना धाम महाभारत काल के गौरवशाली इतिहास को अपने आंचल में समेटे हुए है।
महाभारत काल और पांडवों का अज्ञातवास: किंवदंतियों और लोकमान्यताओं के अनुसार, पांडवों ने अपने 12 वर्ष के वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र माने जाने वाले इन घने जंगलों में समय बिताया था। यहाँ उन्होंने आदि शक्ति माँ 64 जोगनिया की घोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर माता ने उन्हें कौरवों पर विजय का आशीर्वाद दिया था। मंदिर के आसपास आज भी प्राचीन पत्थरों पर कई खंडित निशान और अवशेष देखे जा सकते हैं।
स्वयं-भू प्रकट हुई प्रतिमा: लगभग 300 वर्ष पूर्व एक किसान के हल से टकराकर खून की धारा बहने के बाद खुदाई में माँ की यह चमत्कारिक और सुंदर प्रतिमा प्रकट हुई थी। साथ ही 64 छोटी-छोटी पिंडियाँ (64 योगिनियाँ) भी मिलीं, जो माँ दुर्गा की कलाओं और सिद्धियों का प्रतीक हैं। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. मधुसूदन शर्मा व ग्रामीणों के सहयोग से यहाँ एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया।
अद्भुत चमत्कार और मान्यताएँ:
संतान प्राप्ति: निःसंतान दंपत्ति सच्चे मन से नारियल-चुनरी चढ़ाकर परिक्रमा करते हैं, और माता के आशीर्वाद से उनकी झोली भरती है।
मानसिक शांति व कष्ट निवारण: ऊपरी बाधा, टोने-टोटके या गंभीर मानसिक तनाव से ग्रस्त लोग यहाँ तीन अमावस्या तक आकर पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।
सरकारी उपेक्षा का दर्द: पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया, कई पूर्व मंत्रियों और वर्तमान विधायक श्रीमती रमिला खड़िया सहित कई दिग्गज प्रशासनिक अधिकारी इस धाम पर मत्था टेक चुके हैं, फिर भी यह क्षेत्र आज भी बुनियादी विकास और पर्यटन सर्किट में शामिल होने की बाट جو रहा है। ग्रामीण और श्रद्धालु अपने दम पर इस पवित्र धाम की देखरेख कर रहे हैं।
2. वागड़ का पावागढ़ — माँ नंदिनी माता मंदिर और ग्रामीणों के श्रमदान की अनूठी मिसाल
गुजरात के प्रसिद्ध पावागढ़ की तर्ज पर अरावली की सबसे ऊँची चोटियों पर विराजित माँ नंदिनी माता का धाम कुशलगढ़ क्षेत्र की शान है।
प्रकृति और आध्यात्म का अनूठा मिलन: चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों, घने जंगलों और नीचे बहती माही नदी की सहायक नदियों के बीच स्थित यह मंदिर ऐसा प्रतीत होता है मानो माता स्वयं इस पूरे क्षेत्र की रक्षा कर रही हों। सुबह की पहली किरण और शाम का सूर्यास्त यहाँ के दृश्यों को और भी अलौकिक बना देता है।
600 सीढ़ियों का चमत्कार (श्रमदान की मिसाल): इस मंदिर की सबसे बड़ी प्रेरणादायक कहानी इसके रास्ते की है। पहाड़ का दुर्गम रास्ता होने के कारण बच्चों और बुजुर्गों के लिए ऊपर पहुँचना कठिन था। ऐसे में गाँव वालों ने बिना किसी सरकारी मदद के पिछले तीन वर्षों में खुद के श्रम, पैसे और पसीने से चौकला और बड़ोदिया की तरफ कुल 600 सीढ़ियों का निर्माण कर दिखाया। महिलाओं ने सिर पर पत्थर ढोए और युवाओं ने तकनीक से बढ़कर इस दुर्गम रास्ते को सुगम बना दिया।
नवरात्रि का भव्य पर्व: नवरात्रि के नौ दिनों में यहाँ अखंड ज्योत, दुर्गा सप्तशती पाठ और रोजाना भंडारे का आयोजन होता है। "जय नंदिनी माता" के जयकारों से पूरा अंचल गूँज उठता है, और दूर-दूर से श्रद्धालु दंडवत करते हुए माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।
निष्कर्ष और अपील
कुशलगढ़ के ये दोनों पावन धाम—सरोना धाम और नंदिनी माता मंदिर—वागड़ की आध्यात्मिक रीढ़ हैं। यदि शासन-प्रशासन और पर्यटन विभाग इन धार्मिक स्थलों को टूरिज्म सर्किट से जोड़कर यहाँ पक्की सड़कें, धर्मशाला, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराए, तो यह क्षेत्र राजस्थान का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है। इससे न केवल ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

