वागड़ का सबसे High Voltage सियासी दंगल: नाहरपुरा पंचायत समिति में दो राजनीतिक घरानों की आर-पार की लड़ाई

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राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: बांसवाड़ा की नाहरपुरा पंचायत समिति बनी सूबे की सबसे हॉट सीट, रेशम मालवीया और सुभद्रा गरासिया के बीच कांटे की टक्कर

बांसवाड़ा : राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के शंखनाद के साथ ही दक्षिणी राजस्थान के वागड़ अंचल में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। बांसवाड़ा जिले की नाहरपुरा पंचायत समिति इस समय पूरे प्रदेश की सियासत में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। नई गठित इस पंचायत समिति में प्रधान की कुर्सी को लेकर होने वाला मुकाबला किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे से कम नहीं है, जहां दो दिग्गज राजनीतिक धुरंधर आमने-सामने हैं।

राजस्थान चुनाव: दिग्गजों की साख दांव पर! नाहरपुरा पंचायत समिति क्यों बन गई है सबसे बड़ी हॉट सीट?

दो कद्दावर नेता, सीधा मुकाबला

इस हॉट सीट पर मुकाबला आम चुनाव जैसा नहीं, बल्कि दो दिग्गजों के सियासी वजूद की लड़ाई बन गया है। एक तरफ मैदान में हैं कांग्रेस की कद्दावर नेत्री और पूर्व जिला प्रमुख रेशम मालवीया (जो वार्ड-11 से मैदान में हैं), तो दूसरी तरफ बीजेपी की फायरब्रांड नेत्री और आनंदपुरी से दो बार प्रधान रह चुकीं सुभद्रा गरासिया (वार्ड-13 से प्रत्याशी) ताल ठोक रही हैं।

दिलचस्प बात यह है कि यह मुकाबला केवल दो महिलाओं के बीच का नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े राजनीतिक समीकरण और व्यक्तिगत सियासी रंजिशें भी जुड़ी हैं।

कांग्रेस खेमे में 'मालवीया फैक्टर': खुद संभाल रहे हैं मोर्चा

कांग्रेस पार्टी की ओर से मैदान में उतरीं रेशम मालवीया के समर्थन में उनके पति और वागड़ के कद्दावर आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। क्षेत्र में महेंद्रजीत सिंह मालवीया के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।

कांग्रेस खेमा इसे अपनी प्रतिष्ठा की सीट मानकर चल रहा है। पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया गांव-गांव जाकर जनसभाएं कर रहे हैं और जिला प्रमुख के रूप में कराए गए विकास कार्यों को आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में पारंपरिक वोट बैंक और संगठन की मजबूती के दम पर वे आसानी से बाजी मार लेंगे।

बीजेपी की घेराबंदी: विधायक कैलाश मीणा ने डाला डेरा

दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस सीट को हर हाल में अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। गढ़ी विधायक कैलाश मीणा खुद नाहरपुरा क्षेत्र में डटे हुए हैं और सुभद्रा गरासिया के पक्ष में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं।

सुभद्रा गरासिया का दो बार प्रधान रहने का लंबा प्रशासनिक अनुभव बीजेपी के लिए बड़ा हथियार साबित हो रहा है। इसके साथ ही, सुभद्रा के पति खेमराज गरासिया (जो कभी महेंद्रजीत सिंह मालवीया के बेहद करीबी माने जाते थे, लेकिन अब राजनीतिक विरोधियों के पाले में हैं) इस चुनाव में समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। बीजेपी महिला मोर्चा भी घर-घर जाकर राज्य और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार कर रहा है।

नाहरपुरा का चुनावी गणित और जातीय समीकरण

नवनिर्मित नाहरपुरा पंचायत समिति के राजनीतिक समीकरणों को समझें तो यहाँ की कुल आबादी में करीब 80 प्रतिशत हिस्सेदारी अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की है, जबकि लगभग 20 प्रतिशत मतदाता सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।

  • रोहणिया, चांदबाड़ा और नाहरपुरा जैसे गांवों में सामान्य वर्ग के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है, जिन पर दोनों दल अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं।

  • आदिवासी बहुल होने के कारण यहाँ का मुख्य मतदाता वर्ग उसी पाले में जाएगा जो स्थानीय मुद्दों, विकास और आदिवासियों के हितों की बेहतर नुमाइंदगी का भरोसा दिलाएगा।

  • इसके अलावा, क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) की मौजूदगी भी समीकरणों को त्रिकोणीय या पेचीदा बना सकती है।

क्या कांग्रेस बचा पाएगी अपना गढ़ या बीजेपी मारेगी बाजी?

यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से समाजवादी नेता मामा बालेश्वर दयाल के प्रभाव वाला और बाद में लंबे समय तक कांग्रेस के वर्चस्व वाला क्षेत्र रहा है। लेकिन इस बार बदले हुए राजनीतिक हालात और दिग्गजों की आमने-सामने की जंग ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाहरपुरा पंचायत समिति का यह चुनाव महज एक ग्रामीण निकाय का चुनाव नहीं है, बल्कि यह वागड़ की आगामी राजनीति की दिशा और दशा तय करेगा। फिलहाल दोनों दलों के दिग्गज मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं, और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जनता किसके सिर पर प्रधान का ताज सजाती है।

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