
इंदौर।। छत्तसीगढ़ के अफसर का अपहरण करने वाली दसवीं पास लेडी डॉन बेहद शातिर दिमाग है। वह सारा दोष अपने साथियों के सिर मढ़ रही है। यहां से फरार होने के बाद वह इंटरनेट पर अखबार पढ़कर इंदौर पुलिस की हर गतिविधि और खबरों पर नजर रखती थी। लेडी डॉन बनकर सुर्खियां बनी सपना साहू अब एरोड्रम थाने में पुलिस के सामने गिड़गिड़ा रही है।
महज 10वीं पास सपना अपहरण में खुद के शामिल होने से इंकार करते हुए साथी युवराज रघुवंशी उर्फ दद्दू को मुख्य आरोपी बता रही है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद साथियों ने उससे किनारा कर लिया है। सपना ने साथियों के साथ एरोड्रम क्षेत्र के बिग बोस रिसोर्ट में छत्तीसगढ के अफसर श्रीनिवास और उसके साथी को बंधक बनाकर रखा था और जमकर मारपीट की थी। रिसोर्ट पर छापा पड़ने के बाद वह साथी दद्दू की मदद से शहर छोड़कर भाग गई थी।
इंटरनेट पर शहर के अखबार पढ़कर पुलिस की हर गतिविधि पर नजर
आरोपी दद्दू लेडी डॉन को शाजापुर तक छोड़कर आया था। इसके बाद वह ट्रेन और बस में सफर करती रही। यहां से भागने के बाद वह इंटरनेट पर शहर के अखबार पढ़कर पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रखती थी। सपना का पूर्व पति भी 420 के मामले में जेल जा चुका है। हालांकि वह उससे कोई संबंध होने से इंकार करती है, जबकि मौजूदा पति विनोद साहू के खिलाफ वह मारपीट की एफआईआर दर्ज करा चुकी है।
लेडी डॉन ने रिसोर्ट में प्रेमी युगल के लिए 12 कमरे भी बनाए थे
पुलिस ने छापे के बाद बिग बोस रिसोर्ट सील कर दिया था। हाल ही में एएसपी रूपेश द्विवेदी, सीएसपी मल्हारगंज आर.एस. घुरैया और प्रभारी टीआई बलजीत ने दलबल के साथ छापा मारकर तलाशी ली। तलाशी में हथियार तलवार, गुप्ती, बेसबॉल का बल्ला, शराब की बोतलें और आपत्तिजनक वस्तुएं मिली हैं। पुलिस ने यहां लगे कैमरों का डीवीआर और कम्प्यूटर सीपीयू और लैपटॉप जांच में लिया है। बिग बोस रिसोर्ट जंगल में है। सपना ने इसे यादव नामक व्यक्ति से 70 हजार रुपए महीने पर किराए से लिया था।
गोदाम खाली कराने के लिए फायरिंग
सपना ने बताया, अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में उसने ही गोलीकांड कराया था। इसके पीछे विनोद साहू के गोडाउन का विवाद था। मथुरादास 10 हजार रुपए प्रतिमाह किराया दे रहा था, जबकि दूसरा व्यक्ति 35 हजार रुपए देने को तैयार था। मथुरादास गोदाम खाली नहीं कर रहा था, इसलिए उसके घर पर धमकाने के लिए फायर कराए थे।
गाड़ी के बहाने अफसर से परिचय
सपना ने बताया, छत्तीसगढ़ के अफसर श्रीनिवास से उसका परिचय वहां प्रोटोकॉल में फॉरच्यूनर गाड़ी लगाने को लेकर हुआ था। श्री निवास ने उससे पहले 5 लाख और फिर 2 लाख रुपए ले लिए, पर लौटाने में आनाकानी कर रहा था। इस पर दोनों में विवाद हुआ था।
