भारत ने खोज निकाली दुनिया की सबसे बेहतरीन युद्ध तकनीक, जो दुनिया में कही नहीं

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भारत ने विकसित कर ली दुनिया की सबसे आधुनिक युद्धक तकनीक, अब हर मिसाइल और दुश्मन के जहाजों को मिनटों में गला देगा हिन्दुस्तान, पूरी दुनिया में किसी के पास भी नहीं है इसका तोड़ - जानें इसके बारे में और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें इसे, भारत माता की जय, जय हिन्द
मिनटों में ख़ाक हो जाएँगी पाकिस्तान और चीन के सभी विमान और मिसाइलें
    नई दिल्ली।। धीरे-धीरे समय के साथ युद्ध का स्वरुप भी बदलता रहा है और आज इसी बदलते स्वरुप के कारण ही अमेरिका ने लेजर आधारित नई युद्ध प्रणाली पर काम करना शुरू कर दिया है | बता दें कि अमेरिका तो केवल लेजर प्रणाली पर ही काम कर रहा है लेकिन भारतीय वैज्ञानिक उससे भी हजारों कदम आगे एक ऐसी परियोजना पर काम कर रहे है जिसे भारतीय साइंसदानों ने आम दिया है काली |
    जो देश पाकिस्तान और चीन जैसे शरारती और धोखेबाज मुल्कों से घिरा हो भला उस मुल्क को शांति से जीवन बिता पाना कैसे संभव होगा | चीन आये दिन भारत को आँखें दिखाता रहता है तो वही पाकिस्तान अपनी परमाणु मिसाइलों के दम पर भारत को उकसाता और युद्ध की धमकी देता रहता है | इसीलिए भारतीय साइंसदानों ने यह तय किया है कि वे एक ऐसी तकनीक का विकास करेंगे जो चीन और पाकिस्तान की तरफ से आने वाली हर एक मिसाइल को सीधा और मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम होगी |
जानें क्या है काली-
    KALI 5000– जो अवांछित हवाई जहाज और मिसाईल, रॉकेट समेत हर अवांछनीय वस्तु के इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक सर्किट और चिपों को इलेक्ट्रॉन माईक्रोवेव तरंगों के शक्तिशाली झटके से से फेल कर हमारे देश व सीमाओं की रक्षा करेगा | ये एसीलिरेटर इलेक्ट्रान की ऊर्जा को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन में बदल कर हाई एनर्जी वाली तरंगों में बदल देता है |
    भारत गोपनीय तरीके से ‘काली 5000′ (किलो एंपीयर लीनियर इंजेक्टर) मिशन पर अनुसंधान में जुटा है। यह अनुसंधान पूरा हो जाने पर भारत की हवाई सुरक्षा अभेद हो जाएगी, काली 5000 मिशन 1985 में Director of the BARC डॉ. आर. चिदंबरम द्वारा प्रस्तुत किया गया था और 1989 में इस महत्वपूर्ण सामरिक योजना पर आधिकारिक तौर पर / मूर्तरूप से काम शुरू कर दिया गया,DRDO और भाभा परमाणु रिसर्च सेंटर भी इस सामरिक महत्व की स्टार वार्स सरीखी योजना का सहभागी है |
      हाई एनर्जी वाली ये तरंग दुश्मन मिसाइलों और लड़ाकू जहाजों पर बेआवाज बिजली की तरह कहर बनकर टूटेगी और पल भर में दुश्मन को जला कर खाक कर देंगी | खबरों के मुताबिक काली पर लंबे वक्त से रिसर्च चल रहा है, इसके कुछ प्रोटोटाइप तैयार भी किए जा चुके हैं, लेकिन पूरी हथियार प्रणाली का विकास अभी भी जारी है |
     माना जा रहा है कि प्रोजेक्ट काली सफल हो गया तो वाटर फिल्ड कैपिस्टर के जरिए ऊर्जा पैदा करने वाले High-Power Microwave gun को विमानों और दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी लगाया जा सकेगा |
     बेशक काली को पूरी तरह से विकसित करने में अभी बहुत रिसर्च की जरूरत है, क्योंकि खबरों के मुताबिक शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को हथियार-प्रणाली के तौर पर नहीं शुरू किया गया था |
भारत के लिए है कितना फायदेमंद –
      यह वह तकनीक है जिसके जरिए लेजर जैसी अदृश्य बीम को फायर करके अपनी तरफ आ रहे आक्रामक हथियार को नष्ट किया जा सकेगा | काली 5000 मिशन पूर्ण हो जाने पर दुश्मन की मिसाइल, विमान यहां तक तक कि अंतरिक्ष में उपग्रह को भी हवा में ही मार गिराया जा सकेगा | या यूं कहें कि परिंदा भी देश के आकाश से भारत की तरफ बिना उसकी इजाजत के आंख उठा कर नहीं देख सकेगा |
     जानकारों की माने तो भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर में इस तकनीक को अन्य कार्यों में काम लेता रहा है | अब इसी तकनीक को और अधिक परिष्कृत करने का काम चल रहा है जिससे अंतरिक्ष में ही जासूसी, सैन्य व संचार के हर तरह के उपग्रहों तक को समाप्त कर सकें साथ ही दूर दुश्मन देश के विमान, संचार और रॉकेट मिसाईल तंत्र को भारत में बैठे बैठे ठप किया जा सके इसी सैन्य ताकत को बढ़ाने में इसके इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है। डीआरडीओ भी इस मिशन में भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर काम कर रहा है |
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