हाईकोर्ट के जज पर महिला जज ने लगाया था ME 2 का आरोप

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सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
    भारत में #MeToo के कई मामले सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महिला न्यायिक अधिकारी की बहाली की याचिका पर जांच की सहमति जताई है. महिला अधिकारी ने मध्य प्रदेश में हाईकोर्ट जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.
   जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा याचिका स्वीकार की और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को नोटिस जारी किया.
     पीड़ित महिला की वकील इंदिरा जयसिंह ने मामले की जल्दी सुनवाई का दबाव डाला तो इस पर बेंच ने कहा, 'अधिसूचना छः हफ्तों में वापस आ जाएगी. हम प्रतिक्रिया पाने के बाद इसे सुनेंगे.' याचिका में राज्यसभा द्वारा गठित एक जांच पैनल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का हवाला दिया गया है.
    साल 2015 में राज्यसभा के 58 सदस्यों ने आरोपी जज को पद से हटाने को प्रस्ताव पारित करने के लिए एक नोटिस दिया था, जिसके बाद जांच पैनल बनाया गया था. इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के आर बानुमथी, रिटायर्ड जस्टिस मंजुला छेल्लूर और वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल थे. पैनल ने बीते साल दिसंबर में अपनी रिपोर्ट पेश की थी.
     रिपोर्ट में कहा गया था कि महिला जज की ओर से लगाए गए आरोप शंका के परे साबित नहीं हो सकते. हालांकि इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि महिला जज का सत्र के बीच में ही ट्रांसफर करना उचित नहीं था. पैनल ने रिपोर्ट में कहा था, 'ऐसी परिस्थिति में शिकायतकर्ता के पास इस्तीफे के अलावा कोई और रास्ता नहीं था क्योंकि उस वक्त उनकी बेटी की परीक्षाएं चल रही थीं.'

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