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₹50 करोड़ का 'खूनी' खेल: डायलिसिस कराने गए बीमार शिक्षक की 70 बिस्वा जमीन हड़पी, BJP नेता समेत 10 पर FIR

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बनारस में बड़ा खेल: डायलिसिस कराने गए बुजुर्ग शिक्षक की 50 करोड़ की जमीन हड़पी, BJP जिला उपाध्यक्ष और रजिस्ट्रार समेत 10 पर FIR

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से धोखाधड़ी और जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। यहाँ एक बीमार और सेवानिवृत्त शिक्षक को डायलिसिस कराने के बहाने ले जाकर, उनकी करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की 70 बिस्वा कीमती जमीन धोखे से अपने नाम लिखवा ली गई।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट के आदेश पर भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह, तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार (उपनिबंधक) अनिल कुमार और रजिस्ट्री दफ्तर के क्लर्क सत्यांशु सिंह समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने रोहनिया थाने में आईपीसी की संगीन धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

अपनों ने ही बुना जालसाजी का ताना-बाना

यह पूरा मामला रोहनिया थाना क्षेत्र के मोहनसराय का है। पीड़ित ओमप्रकाश मिश्रा एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और पिछले दो वर्षों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्हें हफ्ते में दो बार डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।

पीड़ित की पत्नी प्रमिला मिश्रा द्वारा कोर्ट में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, इस पूरे खेल की शुरुआत घर के ही लोगों ने की:

  • मदद के बहाने एंट्री: ओमप्रकाश मिश्रा के भतीजे विशाल मिश्रा और घरेलू ड्राइवर रवि उपाध्याय ने बीमारी के दौरान उन्हें डायलिसिस के लिए अस्पताल ले जाने में मदद करना शुरू किया।

  • झांसे में लिया: आरोपियों ने बुजुर्ग शिक्षक को झांसा दिया कि वे उनका नया आयुष्मान कार्ड बनवा देंगे, जिससे उनके इलाज का खर्च काफी कम हो जाएगा।

  • बैंक खाता और मोबाइल नंबर बदला: आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर आरोपियों ने ओमप्रकाश के नाम से एक नया बैंक खाता खुलवाया। जालसाजी को छिपाने के लिए उनका पुराना मोबाइल नंबर और पेंशन खाते से लिंक नंबर भी बदलवा दिया, ताकि परिवार को किसी भी ट्रांजैक्शन या गतिविधि का पता न चल सके।

डायलिसिस के बाद अचेत अवस्था में कराई 50 करोड़ की रजिस्ट्री

घटनाक्रम के मुताबिक, 7 अप्रैल 2026 को भतीजा विशाल मिश्रा और ड्राइवर रवि उपाध्याय पीड़ित ओमप्रकाश को डायलिसिस के लिए महमूरगंज स्थित गैलेक्सी हॉस्पिटल ले गए।

साजिश का चरम: डायलिसिस की प्रक्रिया के बाद ओमप्रकाश मिश्रा पूरी तरह अचेत (बेहोश) थे। इस हालत में भी आरोपी उन्हें अस्पताल से सीधे गंगापुर निबंधन कार्यालय (रजिस्ट्री दफ्तर) ले गए। आरोप है कि वहाँ तत्कालीन उपनिबंधक (सब-रजिस्ट्रार) अनिल कुमार और क्लर्क सत्यांशु सिंह की मिलीभगत से महज़ 7 मिनट के भीतर (शाम 4:34 बजे से 4:41 बजे के बीच) करीब 70 बिस्वा पुश्तैनी जमीन का बैनामा और दो दानपत्र भाजपा नेता सुरेश कुमार सिंह व अन्य आरोपियों के करीबियों के नाम दर्ज करा लिए गए।

कोर्ट के दखल के बाद जागा प्रशासन

जब इस महाघोटाले की भनक पीड़ित परिवार को लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर पीड़ित की पत्नी प्रमिला मिश्रा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सीजेएम कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के कड़े रुख और आदेश के बाद आखिरकार 5 जुलाई को रोहनिया पुलिस ने भाजपा जिला उपाध्यक्ष समेत सभी 10 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

इस मामले के सामने आने के बाद वाराणसी के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की गहनता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

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