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राम मंदिर दान घोटाला: CCTV में कैद हुई 70 बार चोरी, SIT ने ट्रस्टी अनिल मिश्रा को माना जिम्मेदार!

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ब्रेकिंग न्यूज़: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ा खुलासा, SIT के राडार पर ट्रस्टी अनिल मिश्रा

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की आंच अब केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंच गई है। SIT की जांच रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी अनिल मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं और उन्हें सीधे जांच के घेरे में ले लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दान प्रबंधन में हुई इस बड़ी सेंधमारी के पीछे भारी प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को मुख्य वजह माना जा रहा है।

Anil Mishara in Ram Mandir Chori Case


SOP को ठेंगे पर रखा; बिना फ्रिस्किंग के होती रही नोटों की गिनती

SIT की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 6 फरवरी 2025 को दान प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए एक विस्तृत Standard Operating Procedure (SOP) तैयार की गई थी। इस SOP के तहत काउंटिंग रूम (दान गिनती कक्ष) के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए थे:

  • अनिवार्य फ्रिस्किंग (जांच): कमरे में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सघन तलाशी।

  • पॉकेटलेस यूनिफॉर्म: गिनती करने वाले स्टाफ के लिए बिना जेब वाले कपड़े।

  • बायोमेट्रिक अटेंडेंस और CCTV: हर गतिविधि पर तीसरी आंख की सख्त निगरानी।

  • प्रतिबंध: किसी भी प्रकार के निजी सामान को अंदर ले जाने पर पूरी रोक।

SIT का बड़ा आरोप: अनिल मिश्रा ट्रस्ट की ओर से इस पूरे वित्तीय प्रबंधन और गिनती व्यवस्था की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे। इसके बावजूद, सुरक्षा के सबसे अहम नियम यानी 'फ्रिस्किंग' (कर्मचारियों की तलाशी) को जमीन पर लागू ही नहीं होने दिया गया।

सब कुछ जानते हुए भी साधी चुप्पी, नियमों को किया कमजोर

SIT ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का विशेष तौर पर जिक्र किया है कि अनिल मिश्रा को आंतरिक सूत्रों से लगातार यह जानकारी मिल रही थी कि काउंटिंग रूम में कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जा रही है। इसके बावजूद, उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किया।

यही नहीं, बाद में अनिवार्य फ्रिस्किंग के कड़े नियम को बदलकर "रेगुलर/रैंडम" (कभी-कभार) फ्रिस्किंग में तब्दील कर दिया गया। SIT के अनुसार, यह ढील सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकती है, और बाद में इस कमजोर नियम का भी पालन नहीं किया गया। इसे जांच दल ने सबसे गंभीर 'ऑपरेशनल चूक' माना है।

CCTV में कैद हुई करतूत: 70 बार दिखे संदिग्ध वाकये

जांच के दौरान जब काउंटिंग रूम के CCTV फुटेज खंगाले गए, तो हैरान करने वाले दृश्य सामने आए। फुटेज में लगभग 70 ऐसे उदाहरण मिले हैं, जहां काउंटिंग कर्मचारी नोटों के बंडल या खुले कैश को कथित तौर पर छिपाते, दबाते या वहां से हटाते हुए साफ देखे गए।

चहेते को दी कमान: रिपोर्ट में काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव की नियुक्ति पर भी गंभीर उंगली उठाई गई है। SIT के अनुसार, श्रीवास्तव की नियुक्ति अनिल मिश्रा की सीधी सिफारिश पर की गई थी। काउंटिंग रूम में अनुशासन और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कराने की सीधी जिम्मेदारी श्रीवास्तव की ही थी, जिसमें वे पूरी तरह विफल रहे।

⚖️ अब तक की कार्रवाई और आगे क्या?

इस मामले में अब तक कई आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है और छह काउंटिंग कर्मचारियों को सीधे तौर पर मुख्य संदिग्ध माना गया है।

निष्कर्ष: SIT की इस प्रारंभिक रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि राम मंदिर के चढ़ावे में लगी यह सेंध सिर्फ कुछ कर्मचारियों की चालाकी नहीं, बल्कि प्रबंधन के स्तर पर हुई एक बड़ी मिलीभगत या गंभीर लापरवाही का नतीजा है। अब जांच का दायरा ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही और वित्तीय गड़बड़ियों के पर्दे के पीछे छिपे किरदारों तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां या कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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