नियमों को ताक पर रखकर बनीं दुकानें? PWD की NOC और नगरपालिका की चुप्पी से गहराया रहस्य!

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स्टेट हाईवे किनारे 4 दुकानों की स्वीकृति पर उठे गंभीर सवाल; क्या बदले नियम या किसी को मिला 'विशेष लाभ'?

बांसवाड़ा/राजस्थान।। जिले की गढ़ी-परतापुर नगरपालिका क्षेत्र में स्टेट हाईवे के किनारे हुए एक व्यावसायिक निर्माण ने क्षेत्र में नियमों की धज्जियां उड़ाने और पक्षपात के आरोपों को हवा दे दी है। गढ़ी से अगरपुरा जाने वाले मुख्य मार्ग पर करीब एक एयर (लगभग 1,089 वर्गफीट) के भूखंड पर धड़ल्ले से चार दुकानों का निर्माण करा दिया गया। इस निर्माण के सामने आने के बाद से ही स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Garhi Shop Controversy

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जहां आम जनता के लिए निर्माण के कड़े नियम लागू हैं, वहीं इस खास मामले में नियमों को दरकिनार कर विशेष रियायत दी गई है।

विवाद के केंद्र में क्यों है यह निर्माण? जानिए मुख्य बिंदु:

  • दोहरे मापदंडों का आरोप: स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी मार्ग पर बने अन्य सभी मकानों और दुकानों का निर्माण सरकार द्वारा निर्धारित दूरी (सेटबैक) छोड़कर किया गया है। लेकिन इस विशिष्ट भूखंड पर नियमों को ताक पर रखकर सड़क के बिल्कुल करीब निर्माण कर दिया गया।

  • गणित पर उठे सवाल: उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, इस भूखंड का फ्रंट करीब 70 फीट है। यदि नियमतः सड़क से लगभग 50 फीट की दूरी छोड़कर निर्माण की अनुमति दी जाती, तो बची हुई जगह पर चार दुकानों का खड़ा होना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव था। ऐसे में यह निर्माण किस जादुई अनुमति के आधार पर हुआ, यह जांच का विषय है।

  • नियम बदले तो सबको लाभ क्यों नहीं?: क्षेत्रवासियों का तर्क है कि यदि राज्य सरकार या स्वायत्त शासन विभाग ने सेटबैक नियमों में कोई ढील दी है, तो उसका फायदा सिर्फ एक रसूखदार को ही क्यों मिला? अगर कोई नया नीतिगत बदलाव हुआ था, तो पहले अधिक दूरी छोड़कर निर्माण करने वाले अन्य भूखंड स्वामियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए था।

पीडब्ल्यूडी (PWD) की भूमिका और NOC पर संशय

स्टेट हाईवे से सटे किसी भी निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनापत्ति (NOC) अनिवार्य होती है।

बड़ा सवाल: क्या इस व्यावसायिक निर्माण के लिए PWD से NOC ली गई थी? यदि हाँ, तो सार्वजनिक सुरक्षा और हाईवे के भविष्य के चौड़ीकरण को नजरअंदाज कर यह NOC कैसे जारी हुई? और यदि NOC नहीं ली गई, तो नगरपालिका ने किस आधार पर निर्माण की स्वीकृति दे दी? स्थानीय लोग अब इस रहस्यमयी एनओसी को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।

कैमरे के सामने आने से कतरा रहे जिम्मेदार अधिकारी

इस पूरे घालमेल और जनता के आक्रोश पर जब गढ़ी-परतापुर नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो विभाग में हड़कंप मच गया। समाचार लिखे जाने तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने आकर आधिकारिक बयान देने या सफाई पेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अधिकारियों का यह मौन इस मामले में दाल में कुछ काला होने के संदेह को और पुख्ता करता है।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

फिलहाल, इस निर्माण को लेकर कस्बे में तरह-तरह की चर्चाएं आम हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्माण से जुड़े फाइलों और स्वीकृति दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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