₹50 का चमत्कार: डॉ. विशाल राव का 'AUM डिवाइस' बना गले के कैंसर पीड़ितों की नई आवाज

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गरीबी के अंधेरे में उम्मीद की नई किरण: ₹50 के उपकरण ने गले के कैंसर पीड़ितों को लौटाई उनकी आवाज

बेंगलुरु: चिकित्सा विज्ञान का असली मकसद तब सार्थक होता है जब कोई तकनीक सिर्फ अमीरों के ड्राइंग रूम तक सीमित न रहकर किसी बेबस इंसान की आंखों के आंसू पोंछ सके। बेंगलुरु के प्रसिद्ध हेड एंड नेक ऑन्को-सर्जन डॉ. विशाल राव (Dr. Vishal Rao) ने इस बात को साबित करते हुए एक ऐसा क्रांतिकारी आविष्कार किया है, जिसने देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भारत का नाम ऊंचा कर दिया है।

₹50 का चमत्कार: डॉ. विशाल राव का 'AUM डिवाइस' बना गले के कैंसर पीड़ितों की नई आवाज

क्या है 'AUM वॉइस प्रोस्थेसिस' की पूरी कहानी?

  • ₹35,000 का महंगा विदेशी डिवाइस: गले या लैरिंक्स कैंसर के इलाज के दौरान जब मरीज का वॉइस बॉक्स निकालना पड़ता है, तो उसकी बोलने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है। अब तक बाजार में उपलब्ध विदेशी वॉइस डिवाइस की कीमत ₹15,000 से ₹35,000 तक होती थी, जिसे एक आम या गरीब भारतीय परिवार के लिए खरीद पाना लगभग असंभव था।

  • महज ₹50 में स्वदेशी समाधान: मरीजों का दर्द देखकर डॉ. विशाल राव ने अपने इंजीनियर साथी शशांक महेश के साथ मिलकर एक नई पहल की। दोनों ने मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन का उपयोग करके एक ऐसा स्वदेशी वॉइस डिवाइस तैयार किया, जिसकी निर्माण लागत महज ₹50 (1 डॉलर से भी कम) आई।

  • कैंसर सर्वाइवर्स को मिली नई जिंदगी: इस किफायती 'AUM वॉइस प्रोस्थेसिस' डिवाइस की मदद से गले के कैंसर की सर्जरी के बाद आवाज खो चुके सैकड़ों गरीब मरीज दोबारा खुलकर बोलने, अपनों से दिल की बात साझा करने और आत्मनिर्भर बनने में सक्षम हुए हैं।

वैश्विक मंच पर मिली खास पहचान

सोशल मीडिया पर अक्सर यह धारणा फैलाई जाती है कि इस नवाचार की सराहना नहीं हुई, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। डॉ. विशाल राव के इस फ्रूगल इनोवेशन (Frugal Innovation) को फोर्ब्स, बीबीसी, TEDx और कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा मंचों पर न केवल सराहा गया है, बल्कि सम्मानित भी किया जा चुका है।

चिकित्सा और करुणा का यह अनोखा मेल दिखाता है कि जब सेवा भावना मजबूत हो, तो विज्ञान चमत्कार कर सकता है। बेबस और गरीब लोगों की आवाज बनकर उभरे डॉ. विशाल राव का यह योगदान स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है।

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