Labour Department श्रमिकों के हक पर डाका: श्रम विभाग में 40% कमीशन का बड़ा खेल, ई-मित्र और बाबुओं की सांठगांठ उजागर

0
Translate News:

नागौर में श्रम विभाग की छात्रवृत्ति योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: दलालों, ई-मित्र और बाबुओं का 40% कमीशन सिंडिकेट बेनकाब

नागौर। राजस्थान सरकार के श्रम विभाग (BOCW) द्वारा गरीब और असहाय निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए चलाई जा रही "निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना" नागौर जिले में संस्थागत भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है। मजदूरों के बच्चों का हक छीनकर दलालों, ई-मित्र संचालकों और विभागीय बाबुओं का एक संगठित सिंडिकेट 40 प्रतिशत कमीशन की वसूली कर रहा है।

नागौर छात्रवृत्ति घोटाला: 40% फिक्स कट पर बंट रहा गरीब बच्चों का हक

कमीशनखोरी का 'मोडस ऑपरेंडी': ऐसे लूटा जा रहा है हक

  • ई-मित्र और बैंक बीसी की मिलीभगत: कई ई-मित्र संचालक (जो बैंक BC भी हैं) पात्र और अपात्र अभिभावकों से सीधे संपर्क कर छात्रवृत्ति पास कराने के एवज में 40% कमीशन एडवांस तय करते हैं।

  • बाबुओं की फिक्स कटनी और फर्जी आपत्तियां: विभाग के कर्मचारी केवल उन्हीं आवेदनों को अप्रूव करते हैं जो चुनिंदा दलालों के जरिए आते हैं। इसके बदले बाबुओं को 25% से 30% तक कट मिलता है। बिना दलाल के सीधे आवेदन करने वाले गरीब छात्रों के फॉर्म में फर्जी तकनीकी खामियां निकालकर उन्हें निरस्त कर दिया जाता है।

  • AePS बायोमेट्रिक से जबरन वसूली: जैसे ही DBT के जरिए छात्र के खाते में पैसे आते हैं, विभागीय कर्मचारी इसकी जानकारी ई-मित्र संचालक को दे देते हैं। इसके बाद अभिभावक का बायोमेट्रिक (AePS) लगवाकर पूरी राशि निकाल ली जाती है और 40% कमीशन काटकर बाकी रकम थमा दी जाती है।

जनता में भारी आक्रोश, उठी कड़े एक्शन की मांग

इस संगठित लूट के सामने आने के बाद जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में गहरा रोष है। प्रशासन से तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की गई है:

  1. स्पेशल विजिलेंस व ऑडिट: पिछले दो वर्षों में नागौर श्रम विभाग से स्वीकृत सभी छात्रवृत्ति आवेदनों की ई-मित्रवार विजिलेंस जांच और स्पेशल ऑडिट कराई जाए।

  2. रैंडम एलोकेशन सिस्टम: स्थानीय स्तर पर सांठगांठ खत्म करने के लिए आवेदनों के वेरिफिकेशन का काम जिला कार्यालय से हटाकर राज्य स्तर पर 'सेंट्रलाइज्ड रैंडम एलोकेशन' से जोड़ा जाए।

  3. FIR और लाइसेंस रद्द: घोटाले में शामिल ई-मित्र कियोस्क के लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएं और दोषी कर्मचारियों, दलालों व संचालकों पर आपराधिक मुकदमे (FIR) दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)
Loading...

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top