चाचाकोटा में निखरा local हुनर: मार्बल आर्टिस्ट सुनिधि की कला ने देश-विदेश के पर्यटकों को मोहा

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पर्यटन से रोजगार तक: 'मिनी मालदीव' चाचाकोटा में उम्मीदों की नई भोर, स्थानीय हुनर को मिल रहे नए पंख

बांसवाड़ा, राजस्थान : विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए खास पहचान बना चुका चाचाकोटा अब केवल पर्यटकों के घूमने-फिरने का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय लोगों के जीवन में खुशहाली और आर्थिक स्वावलंबन का नया माध्यम बन गया है।

पर्यटन से रोज़गार तक: ‘मिनी मालदीव’ चाचाकोटा में उम्मीदों की नई भोर, स्थानीय हुनर को मिले नए पंख

चाचाकोटा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान का सीधा फायदा बांसवाड़ा के छोटे-छोटे व्यापारियों, चाय-नाश्ते के ठेले वालों, भुट्टा-चिप्स बेचने वाले विक्रेताओं से लेकर पेट्रोल पंप और होटल व्यवसायियों को मिल रहा है। पर्यटन ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोले हैं, जिससे ग्रामीणों में यह उम्मीद जगी है कि अब क्षेत्र से होने वाला पलायन रुकेगा और आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल होगा।

मार्बल आर्टिस्ट सुनिधि की कला को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

इस बदलाव का सबसे खूबसूरत उदाहरण क्षेत्र की उभरती हुई आर्टिस्ट सुनिधि कुशवाह हैं। पत्थरों पर जीवंत स्केच, पेंटिंग और मार्बल आर्ट उकेरने वाली सुनिधि की कला का सही मूल्य अक्सर छोटे शहरों में नहीं मिल पाता था।

हाल ही में स्थानीय सहयोग से सुनिधि को चाचाकोटा में अपनी आर्ट व क्राफ्ट की छोटी-सी स्टॉल लगाने का अवसर मिला। शनिवार और रविवार को देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने न केवल सुनिधि की कला की जमकर सराहना की, बल्कि उनके उत्पादों की खरीदारी भी की। यह केवल एक कलाकार की आय नहीं, बल्कि बांसवाड़ा की पारंपरिक कला, हुनर और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान है।

स्वरोजगार अपनाने का आह्वान

क्षेत्रीय प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध जनों ने जिले की माताओं, बहनों और हस्तशिल्प से जुड़े हर कारीगर से अपील की है कि वे आगे आएं और चाचाकोटा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर अपने स्थानीय उत्पादों की स्टॉल लगाएं। इससे न केवल स्थानीय कला को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हर हाथ को काम और बेहतर आमदनी का साधन मिलेगा।

"विकास के साथ विनाश नहीं"—स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की अपील

पर्यटन के बढ़ते प्रभाव के बीच पर्यावरण सुरक्षा की चिंता भी रेखांकित की गई है। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे चाचाकोटा की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं।

  • प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र: चाचाकोटा में प्लास्टिक का उपयोग न करें और कचरा तय स्थानों पर ही फेंकें।

  • प्रकृति की सुरक्षा: पर्यटन तभी वरदान साबित होगा जब हम अपनी पर्यावरण संपदा को सुरक्षित और स्वच्छ रखेंगे।

संदेश: "प्रकृति और विकास का संतुलन ही बांसवाड़ा के समृद्ध और सतत भविष्य की कुंजी है।"

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