धरती के भगवान या 'टारगेट' के गुलाम? चंडीगढ़ में ICU के नाम पर लूट का पर्दाफाश

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'कमीशन और टारगेट' के खेल पर जांबाज डॉक्टर का प्रहार: चंडीगढ़ में प्राइवेट हॉस्पिटल माफिया के खिलाफ खोला मोर्चा

चंडीगढ़ / जीरकपुर : डॉक्टर को समाज में धरती का भगवान माना जाता है, लेकिन जब स्वास्थ्य सेवा जैसे पवित्र पेशा कॉरपोरेट मुनाफाखोरी और 'टारगेट' की भेंट चढ़ने लगे, तो आम जनता का भरोसा डगमगाने लगता है। हाल ही में ट्राइसिटी क्षेत्र में एक जांबाज महिला डॉक्टर ने प्राइवेट अस्पतालों की इसी मनमानी और अनैतिक रवैये के खिलाफ निडरता से आवाज उठाकर पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है।

"मुनाफा उनका, बदनामी मेरी क्यों?" जानिए एक महिला डॉक्टर के इस्तीफे ने क्यों हिला दिया प्राइवेट हेल्थ सिस्टम
1. पहले ही दिन थमाया इस्तीफा:

जीरकपुर में अपना क्लिनिक चलाने वाली इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रभलीन कौर ने चंडीगढ़ क्षेत्र के एक नामी निजी अस्पताल में बतौर कंसल्टेंट फिजिशियन जॉइन किया था। हालांकि, ड्यूटी के पहले ही दिन अस्पताल प्रबंधन के अनैतिक रवैये और गैर-ज़रूरी आईसीयू (ICU) दाखिले के दबाव को देखकर उन्होंने तुरंत इस्तीफा थमा दिया।

2. अनैतिक दबाव और मरीजों की मजबूरी का फायदा:

डॉ. प्रभलीन ने एक सोशल मीडिया वीडियो के जरिए अपना दर्द और आक्रोश साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन (जिसमें स्वयं एक स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं) उन पर मरीजों को जबरन ICU में शिफ्ट करने का दबाव बना रहा था, ताकि परिजनों से भारी-भरकम बिल वसूला जा सके।

3. डॉक्टरी नैतिकता से समझौता मंजूर नहीं:

डॉ. प्रभलीन ने स्पष्ट कहा, "किसी मरीज को ICU की आवश्यकता है या नहीं, यह निर्णय विशुद्ध रूप से मेडिकल ग्राउंड्स पर फिजिशियन का होता है। अस्पताल को डॉक्टर नहीं, बल्कि अपनी फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए रबर स्टैंप चाहिए था। बदनाम मेरी मोहर होती और मुनाफा उनका। मैंने अपनी नैतिकता को चंद रुपयों के लिए न बेचने का फैसला किया।"

4. सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल:

जब लोगों ने उनसे उस अस्पताल का नाम सार्वजनिक करने का अनुरोध किया, तो उन्होंने अपनी सीमाओं का जिक्र करते हुए देश के प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई राजनीतिक पहुंच या अपार धनबल नहीं है, जिससे वे कानूनी या प्रशासनिक प्रताड़ना का सामना अकेले कर सकें। हालांकि, वे सही के साथ खड़ी रहेंगी।

5. पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी का मिला समर्थन:

इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद मानवाधिकार आयोग के सदस्य और पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी डॉ. प्रभलीन के समर्थन में आए। उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों की तुलना 'फाइव स्टार होटलों' और 'कॉरपोरेट दफ्तरों' से करते हुए चिंता जताई कि कैसे डॉक्टरों को वित्तीय टारगेट देकर चिकित्सा सेवा को लूट का जरिया बना दिया गया है।

युवा डॉक्टरों से अपील और जन-आक्रोश

डॉ. प्रभलीन ने अपने साथी और विशेषकर युवा डॉक्टरों से अपील की है कि वे करियर की शुरुआत में मैनेजमेंट के अनैतिक दबाव के आगे न झुकें। यह पेशा मरीजों के अटूट विश्वास पर टिका है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य महकमे में हलचल है और आम जनता के बीच प्राइवेट अस्पतालों के अत्यधिक बिलिंग मॉडल को लेकर गुस्सा और डर दोनों साफ देखा जा रहा है।

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