जोधपुर : नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
1. समय सीमा की अनदेखी और देर रात जेल आगमन
राजस्थान हाईकोर्ट से इलाज के लिए मिली 20 दिन की अंतरिम मेडिकल पैरोल 27 अक्टूबर (मंगलवार) को खत्म हो रही थी।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख:
आसाराम के वकीलों ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पैरोल अवधि बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए मंगलवार शाम 5:00 बजे तक जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर करने का कड़ा आदेश दिया था। एयर एम्बुलेंस से पहुंचे जोधपुर:
उज्जैन/इंदौर में इलाज करा रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद एयर एम्बुलेंस से जोधपुर एयरपोर्ट लाया गया। पौने 6 घंटे की देरी:
जोधपुर एयरपोर्ट से समर्थकों और पुलिस के काफिले के बीच आसाराम करीब पौने 6 घंटे की देरी से रात लगभग 10:40 बजे सेंट्रल जेल पहुंचे।
2. जेल नियमों का हवाला देकर एंट्री से इनकार
जेल मैनुअल के मुताबिक, सूर्यास्त और निर्धारित समय बीत जाने के बाद किसी भी कैदी को जेल परिसर में दाखिल कराने की अनुमति नहीं दी जाती। सुरक्षा कारणों और नियमों का हवाला देते हुए जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह व प्रशासन ने देर रात आसाराम को जेल के अंदर लेने से साफ इनकार कर दिया।
जेल में प्रवेश न मिलने पर पुलिस और वकील उन्हें भगत की कोठी स्थित निजी अस्पताल (आरोग्यम हॉस्पिटल) ले गए, जहां उन्होंने कड़ी सुरक्षा निगरानी के बीच पूरी रात बिताई।
3. रातानाडा थाने में प्रिज़नर्स एक्ट के तहत FIR दर्ज
समय पर सरेंडर न करने और नियमों का उल्लंघन करने के मामले में जेल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
प्रकरण संख्या 206/2026 दर्ज:
सेंट्रल जेल के प्रहरी बनवारीलाल की लिखित रिपोर्ट पर रातानाडा थाना पुलिस ने 27 अक्टूबर 2026 को राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58(ख) के तहत मामला दर्ज किया है। 3 साल तक की सजा का प्रावधान:
इस धारा के तहत दोषसिद्ध होने पर आरोपी को 3 साल तक के अतिरिक्त कारावास या आर्थिक दंड (अथवा दोनों) की सजा हो सकती है। जांच अधिकारी: इस नए मामले की जांच रातानाडा थाने के सहायक उप-निरीक्षक (ASI) भवानीसिंह को सौंपी गई है।
मुख्य बिंदु एक नज़र में
| विषय | विवरण |
| मामला | 20 दिन की मेडिकल पैरोल के बाद देरी से सरेंडर |
| सरेंडर का तय समय | मंगलवार शाम 5:00 बजे तक (सुप्रीम कोर्ट निर्देश) |
| जेल पहुंचने का समय | मंगलवार रात 10:40 बजे (करीब 6 घंटे की देरी) |
| दर्ज एफआईआर | राजस्थान कारागार अधिनियम की धारा 58(ख), केस नं. 206/2026 |
| संभावित सजा | 3 साल तक अतिरिक्त कारावास या आर्थिक जुर्माना |
राजस्थान कारागार अधिनियम (Rajasthan Prisons Act) की धारा 58(ख) [अंग्रेजी में: Section 58-B of The Prisons (Rajasthan Amendment) Act] कैदियों की पैरोल या अस्थायी रिहाई की अवधि समाप्त होने के बाद समय पर समर्पण (सरेंडर) करने से संबंधित एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है।
इस कानून के तहत कानूनी प्रावधानों, शर्तों और सजा के नियमों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
1. मुख्य कानूनी प्रावधान (Legal Provisions)
राजस्थान कारागार अधिनियम में संशोधन के जरिए जोड़ी गई धारा 58(ख) के अनुसार:
समय पर समर्पण का दायित्व: राज्य सरकार या किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पैरोल, अंतरिम रिहाई या मेडिकल आधार पर छोड़े गए प्रत्येक कैदी का यह कानूनी दायित्व है कि वह रिहाई का समय समाप्त होते ही निर्धारित तारीख और समय पर संबंधित जेल अधीक्षक या जेल अधिकारी के समक्ष खुद को समर्पित (सरेंडर) करे।
अनुशासनहीनता और गैर-कानूनी कृत्य: यदि कोई कैदी पैरोल अवधि समाप्त होने के बाद बिना किसी वैध कानूनी आदेश या विस्तार (Extension) के निर्धारित समय सीमा तक जेल में सरेंडर नहीं करता है, तो इसे कानून का स्पष्ट उल्लंघन और संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) माना जाता है।
2. सजा और दंड के नियम (Penalty Provisions)
धारा 58(ख) के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति/कैदी के खिलाफ निम्नलिखित दंडात्मक कार्रवाई का नियम है:
अतिरिक्त कारावास की सजा: निर्धारित समय पर सरेंडर न करने पर कैदी को मूल सजा के अलावा 3 साल तक की अतिरिक्त जेल की सजा (Imprisonment) हो सकती है।
आर्थिक जुर्माना (Fine): कोर्ट आरोपी पर जुर्माना भी लगा सकता है अथवा कारावास और जुर्माना दोनों से दंडित कर सकता है।
गैर-जमानती अपराध: इस धारा के तहत दर्ज नया मामला एक अलग आपराधिक मामला (FIR) होता है, जिसके लिए कैदी पर अलग से मुकदमा चलाया जाता है।
भविष्य की पैरोल पर प्रभाव: इस धारा के तहत मामला दर्ज होने से कैदी का जेल रिकॉर्ड (History Ticket) प्रभावित होता है, जिससे उसे भविष्य में किसी भी प्रकार की पैरोल या समय से पहले रिहाई (Remission) मिलने में अत्यधिक कठिनाई आती है।
3. प्रक्रियात्मक नियम (Procedural Rules)
जेल प्रहरी/प्रशासन द्वारा FIR: निर्धारित समय (जैसे शाम के समय जेल बंद होने के समय) तक सरेंडर न करने पर जेल प्रशासन द्वारा निकटतम पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई जाती है।
जेल मैनुअल का पालन: जेल मैनुअल के अनुसार सूर्यास्त या तय समय सीमा के बाद किसी कैदी को जेल में दाखिल करने का नियम नहीं होता। यदि कैदी देर रात या नियत समय के बाद पहुँचता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन मानकर आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है।
संक्षेप में
| पहलू | कानूनी स्थिति |
| संबंधित अधिनियम | राजस्थान कारागार अधिनियम (राजस्थान संशोधन) |
| धारा | 58(ख) [Surrender of prisoners on the expiry of temporary release] |
| उल्लंघन | पैरोल खत्म होने पर नियत समय पर सरेंडर न करना |
| अधिकतम सजा | 3 वर्ष तक की अतिरिक्त जेल |
| अतिरिक्त दंड | आर्थिक जुर्माना या कारावास व जुर्माना दोनों |

