ऑर्चिड सेंट्रल स्कूल की मनमानी पर फूटा अभिभावकों का रोष: भारी फीस वृद्धि और बसों के दस्तावेजों में लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
जोधपुर: बाईपास रोड स्थित ऑर्चिड सेंट्रल स्कूल की कार्यप्रणाली को लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्कूल प्रशासन द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस, बस संचालन से जुड़े दस्तावेजों की कमियों और बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किए जाने के गंभीर आरोपों के बीच अभिभावकों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
मुख्य बिंदु:
बस फीस में 25% तक की वृद्धि: चालू शैक्षणिक सत्र में स्कूल प्रशासन ने बस फीस में भारी बढ़ोतरी की है, लेकिन इसके बावजूद बसों के फिटनेस, आरसी और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अचानक बस सेवा बंद करने से संकट: स्कूल प्रशासन द्वारा बसों के संचालन पर 15 दिनों तक रोक लगाने की सूचना दी गई है, जिससे कामकाजी अभिभावकों के सामने बच्चों के आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल: सुबह मरम्मत कार्य के नाम पर ऑनलाइन कक्षाएं चलाने और शाम को बसों की फिटनेस का हवाला देकर सेवा बंद करने से बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ: फीस जमा कराने में थोड़ी सी देरी होने पर बच्चों को परीक्षा से रोकने का दबाव बनाने, महंगी यूनिफॉर्म और किताबों की अनिवार्यता से अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक व मानसिक दबाव पड़ रहा है।
अभिभावकों की प्रमुख मांगें:
दस्तावेजों की जांच: स्कूल की सभी बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र, आरसी, बीमा और परमिट की संबंधित परिवहन विभाग द्वारा तत्काल निष्पक्ष जांच कराई जाए।
फीस वृद्धि की समीक्षा: बस फीस में की गई 25% की वृद्धि और अन्य शुल्कों की पारदर्शिता की जांच हो।
विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि: बस सेवा बंद रहने की अवधि में बच्चों के सुरक्षित आवागमन और नियमित पढ़ाई के लिए स्कूल प्रशासन स्पष्ट व व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित करे।
दबाव की राजनीति पर रोक: फीस को लेकर बच्चों और अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या परीक्षा से वंचित करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।
कड़ी कार्रवाई: पिछले दो वर्षों से की जा रही शिकायतों पर यदि स्कूल प्रशासन दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में यदि प्रशासन ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो अभिभावकों द्वारा इस आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।

