12 साल की भारतीय बच्ची बचा सकती है पूरी दुनिया को

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     12 साल की उम्र में आप क्या कर रहें थे? शायद साइकिल चलाना सीख रहें होंगे। मगर नासिक की एक लड़की ने एक ऐसा काम कर दिखाया है, जो आप और हम सोच भी नहीं सकते। नासिक, महाराष्ट्र की छठी क्लास की श्रुस्ती नेरकर ने एक ऐसा आविष्कार किया है जिससे पानी के संकट की समस्या से छुटकारा मिल सकता है। सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह आविष्कार लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
      श्रुती ने आविष्कार किया है एक ऐसे शावर नोजल का, जिससे पानी की बर्बादी को रोका जा सकता है। इस आविष्कार के जरिए शावर से निकलने वाले पानी में 83 फीसदी से भी ज्यादा कमी आ सकती है। एक सामान्य शावर से प्रति व्यक्ति करीब 80 लीटर पानी की खपत होती है, मगर श्रुस्ती के बनाए नोजल से सिर्फ 15 लीटर पानी से एक व्यक्ति का काम हो सकता है। वह कहती हैं कि इसका आइडिया उसे कार वॉश से आया। श्रुस्ती ने बताया कि एक बार वो अपने पिता के साथ गाड़ी धुलवाने के लिए गईं। वहाँ उन्होंने देखा गाड़ी धोने के लिए सिर्फ दो लीटर पानी का ही प्रयोग किया जाता है।
     इस देख कर श्रुस्ती ने अंतिम निर्णय के लिए इलेक्ट्रिक वायर पाइप और पीवीसी पाइप का भा प्रयोग किया। हालांकि अंत में उसने फोल्डेबल पाइप्स को चुना। अंतिम मॉडल के सफल होने से पहले, श्रुस्ती चार मॉडल बना चुकी थी। पाँचवें प्रयास में कामयाबी उसके हाथ लगी। इस कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि पानी के सर्वश्रेष्ठ प्रयोग के लिए पानी के बहाव को रोका और मोड़ा जाता है। मीडिया खबरों के अनुसार इसमें 80 लीटर की जगह, सिर्फ 15 लीटर पानी का ही प्रयोग किया जाता है। यानि की प्रति व्यक्ति 65 लीटर पानी की बचत।
     इस तकनीक से बचे पानी की मदद से 17 लाख लोगों को 34 दिनों तक पहुंचाया जा सकता है। श्रुस्ती की खोज को सबसे पहले जिला कलेक्टर दिपेंदर सिंह खुशवाहा ने देखा। श्रुस्ती ने पेटेंट के लिए भी आवेदन भर दिया है। दुनिया की 85 फीसदी आबादी सूखे भाग में रहती है। आज भी करीब 80 करोड़ लोगों तक पीने के साफ पानी की सुविधा नहीं है। इसके अलावा 2.5 अरब लोगों को गंदगी में जीना पड़ रहा है। इसका प्रमुख कारण है पानी का अनुचित आवंटन।



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