लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में अब बॉलीवुड भी आगे आने लगा है। फिल्म '3 इडियट्स' में 'चतुर रामलिंगम' (सैलेंसर) का आइकॉनिक किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर वांगचुक के लिए देश से बड़ी अपील की है।
3 इडियट्स के 'चतुर' ने लगाया गुहार: 'मैं नहीं चाहता कि फुंसुक वांगड़ू मर जाए', 15 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं सोनम वांगचुक
नई दिल्ली / लद्दाख: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की मांग को लेकर पिछले 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे देश के महान अन्वेषक (इनोवेटर) और इंजीनियर सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इस बीच, फिल्म '3 इडियट्स' में 'चतुर' का किरदार निभाने वाले अभिनेता ओमी वैद्य ने एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर वांगचुक का पुरजोर समर्थन किया है और देश की जनता से उनकी जान बचाने के लिए आवाज उठाने की अपील की है।
"फुंसुक वांगड़ू को कुछ नहीं होना चाहिए"
गौरतलब है कि ब्लॉकबस्टर फिल्म '3 इडियट्स' में आमिर खान द्वारा निभाया गया 'फुंसुक वांगड़ू' का मुख्य किरदार असल जिंदगी में सोनम वांगचुक के अद्भुत आविष्कारों और जीवन से ही प्रेरित था।
ओमी वैद्य ने वीडियो में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से चल रहे इस अनशन के कारण वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक गिर गया है। ओमी ने भावुक होते हुए कहा:
"मैं नहीं चाहता कि असल जिंदगी का फुंसुक वांगड़ू मर जाए। वे अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।"
जनता और सोशल मीडिया से उठ रही है भारी मांग
अभिनेता ओमी वैद्य ने आम जनता, युवाओं और देशवासियों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को अपने जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले एक महान व्यक्ति की जान बचाई जा सके।
ओमी वैद्य के इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर #StandWithSonamWangchuk और #SaveLadakh जैसे हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। देश भर के बुद्धिजीवी, युवा और आम नागरिक वांगचुक के समर्थन में आ गए हैं।
देश के लिए सोनम वांगचुक का अतुलनीय योगदान
सोनम वांगचुक केवल लद्दाख ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं। उन्हें पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व कार्यों के लिए जाना जाता है:
आइस स्तूप (Ice Stupa): लद्दाख में पानी की कमी से निपटने के लिए उन्होंने कृत्रिम बर्फ के स्तूप बनाने की तकनीक विकसित की, जो गर्मियों में खेती और पेयजल का मुख्य जरिया बनते हैं।
सेकमोल (SECMOL) की स्थापना: उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार करते हुए रटने की प्रणाली को छोड़कर व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास पर आधारित स्कूल की स्थापना की।
सौर ऊर्जा आधारित भवन: शून्य से नीचे के तापमान वाले क्षेत्रों के लिए उन्होंने ऐसे सौर-ऊर्जा संचालित मिट्टी के घर बनाए जो बिना किसी हीटर के भी अंदर से गर्म रहते हैं।
वैश्विक सम्मान: उनके इन अभूतपूर्व योगदानों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018) और रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज से सम्मानित किया जा चुका है।
भावुक हुए फैंस, अनशन तोड़ने की कर रहे हैं अपील
सोशल मीडिया पर लोग लगातार कमेंट्स कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "बिना खाए-पिए 15 दिन तक डटे रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है, व्यवस्था को जागना चाहिए।" वहीं कई फैंस और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वांगचुक से हाथ जोड़कर प्रार्थना की है कि वे अपना अनशन खत्म करें, क्योंकि देश को बदलने और इस सिस्टम से लड़ने के लिए उनका जीवित और स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।

