फर्ज की चढ़ाई: पहाड़ चढ़कर पहुंची स्वास्थ्य टीम, दुर्गम इलाके की गर्भवतियों को मिला सुरक्षा का कवच
सीएमएचओ ने पहाड़ी क्षेत्र में चल रहे सघन अभियान का किया औचक निरीक्षण, आशा और स्वास्थ्यकर्मियों की थपथपाई पीठ
बांसवाड़ा।। कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कठिन से कठिन रास्ते भी आसान हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही जज्बा बांसवाड़ा के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम दुर्गम पहाड़ियों को लांघकर अंतिम छोर पर बैठी गर्भवती महिलाओं तक बेहतर मातृत्व सेवाएं पहुंचा रही है।
जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए चलाए जा रहे चार दिवसीय सघन अभियान के पहले दिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने खुद मोर्चा संभाला। डॉ. राठौड़ दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित डेरी उप स्वास्थ्य केंद्र से करीब 5 किलोमीटर दूर मातावाली हेर डेरी आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे। वहां दुर्गम परिस्थितियों के बीच भी मुस्तैदी से काम कर रही टीम को देखकर उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों और आशा सहयोगिनियों की जमकर सराहना की।
"भौगोलिक परिस्थितियां नहीं बनेंगी स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा"
निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने कहा:
"कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं। हमारा संकल्प है कि जिले की हर गर्भवती महिला तक समय पर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें और कोई भी महिला जरूरी जांच व इलाज से वंचित न रहे।"
जांच रिपोर्ट में दिखी विभाग की मेहनत, सुरक्षित मातृत्व की ओर बढ़ते कदम
आंगनबाड़ी केंद्र पर आशा सहयोगिनियों की मेहनत का असर साफ देखने को मिला, जो घर-घर जाकर 10 गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए केंद्र तक लेकर आईं।
बेहतरीन हीमोग्लोबिन स्तर: जांच के दौरान सिर्फ एक महिला का हीमोग्लोबिन $10.5$ ग्राम मिला, जबकि बाकी सभी महिलाओं का हीमोग्लोबिन $11$ ग्राम के आसपास रहा। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि दुर्गम क्षेत्रों में भी विभाग की नियमित निगरानी और समय पर मिल रहे उपचार के कितने सुखद परिणाम आ रहे हैं।
"घर आकर जांच करती है टीम, मुफ्त मिलती हैं दवाइयां" — लाभार्थी भूरी
पहाड़ी क्षेत्र की रहने वाली गर्भवती महिला भूरी ने अपनी खुशी साझा करते हुए बताया:
"दुर्गम इलाके में रहने के बाद भी हमें कभी अकेलेपन या इलाज की कमी का अहसास नहीं होता। एएनएम और स्वास्थ्यकर्मी फोन पर हमारा हालचाल लेते रहते हैं। अगर हम किसी वजह से केंद्र नहीं जा पाते, तो वे खुद हमारे घर आकर जांच करते हैं और मुफ्त दवाइयां भी देते हैं।"
15 से 18 जुलाई तक 'मिशन मोड' पर स्वास्थ्य विभाग
सीएमएचओ डॉ. खुशपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि 15 से 18 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य:
हर गर्भवती महिला का 100% पंजीकरण करना।
नियमित एएनसी (ANC) जांच और हीमोग्लोबिन परीक्षण करना।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) यानी उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान कर उनका इलाज सुनिश्चित करना।
सुरक्षित प्रसव के जरिए मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भारी कमी लाना है।
विद्यालयों और शहरी क्षेत्रों का भी किया औचक निरीक्षण
अपने दौरे के दौरान सीएमएचओ ने केवल ग्रामीण इलाकों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा:
विद्यालयों का दौरा: डॉ. राठौड़ ने कुंडला खुर्द के दो स्कूलों का दौरा कर संस्था प्रधानों से चिकित्सा विभाग के 'शक्ति दिवस' अभियान की प्रगति पर चर्चा की और बच्चों से संवाद कर उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।
शहरी आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा: इसके बाद उन्होंने सुजारेश्वर आंगनबाड़ी केंद्र (आंबावाड़ी पीएचसी के अधीन) में चल रहे एमसीएचएन (MCHN) सत्र का औचक निरीक्षण किया। वहां उन्होंने टीकाकरण, पोषण गतिविधियों और रिकॉर्ड्स का बारीकी से अवलोकन करते हुए कर्मचारियों को पूरी गंभीरता के साथ सेवाएं देने के निर्देश दिए।

