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'कागजी विकास' का खेल: स्वीकृत नक्शे ताक पर, कॉलोनियों के सार्वजनिक रास्तों पर रसूखदारों का कब्जा

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नक्शों में 40 फीट सड़कें, जमीन पर सिर्फ पगडंडियां: कुशलगढ़ की आवासीय कॉलोनियों में कॉलोनाइजरों की मनमानी से रहवासी बेहाल

बांसवाड़ा/राजस्थान राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ नगर क्षेत्र से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां विकास के नाम पर आवासीय कॉलोनियों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कॉलोनाइजरों द्वारा नगर पालिका से स्वीकृत नक्शों की अवहेलना कर आम जनता को मूलभूत सुविधाओं से महरूम रखा जा रहा है। जिन कॉलोनियों में कागजों पर 40 फीट चौड़ी सड़कें, सार्वजनिक पार्क और चौड़े रास्ते दिखाए गए थे, धरातल पर वे आज महज संकरी पगडंडियों में तब्दील हो चुके हैं।

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कागजों में विकास, धरातल पर कीचड़ और पगडंडियां

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि नगर की एक-दो कॉलोनियों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में आज तक सीसी (CC) सड़कों का निर्माण नहीं कराया गया है। सड़कों के नाम पर सिर्फ कच्ची पगडंडियां बची हैं। स्थिति तब और बदतर हो जाती है जब बारिश के मौसम में ये रास्ते पूरी तरह कीचड़ में डूब जाते हैं। ऐसे में स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।

सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण का खेल

मामला सिर्फ अधूरी सड़कों का नहीं है, बल्कि मिलीभगत और लापरवाही के चलते सार्वजनिक रास्तों पर धड़ल्ले से अतिक्रमण किया जा रहा है। कई रसूखदारों ने रास्तों पर लोहे के गेट लगा दिए हैं, तो कहीं अस्थायी दीवारें खड़ी कर आम रास्तों को पूरी तरह बंद या संकरा कर दिया गया है। इसके अलावा, बच्चों के खेलने और हरियाली के लिए आरक्षित पार्कों की भूमि पर भी कोई विकास कार्य नहीं हुआ है।

ठगी का अहसास: नागरिकों का कहना है कि कॉलोनाइजरों ने नगर पालिका से पास नक्शा दिखाकर और बड़े-बड़े वादे कर उनका भरोसा जीता और महंगे दामों में भूखंड (Plats) बेच दिए। लेकिन प्लॉट बिकते ही वे अपनी जिम्मेदारियों से मुकर गए।

अधिकारियों का रुख: "दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई"

इस गंभीर मामले को लेकर जब नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मुकेश मधु से बात की गई, तो उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा: "स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण और सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण की शिकायतें हमें मिली हैं। नगर पालिका प्रशासन इन सभी मामलों की बारीकी से जांच करवा रहा है। जहां भी अवैध कब्जा पाया जाएगा, उसे तुरंत हटाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आम जनता के आवागमन में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं होगी।"

बड़ा सवाल: आश्वासनों से कब मिलेगी मुक्ति?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या नगर पालिका प्रशासन का यह रुख केवल कागजी आश्वासनों तक सीमित रहेगा, या वाकई धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी? सालों से 40 फीट चौड़ी सड़कों का इंतजार कर रहे कुशलगढ़ के वासियों को उनका हक कब मिलेगा? फिलहाल, पूरे नगर की निगाहें अब प्रशासन के बुलडोजर और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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