आंदोलन के तीसरे हफ्ते में प्रवेश करने पर पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अनशन स्थल पर उनकी गिरती तबीयत और घटते ब्लड शुगर लेवल के कारण पुलिस और मेडिकल टीम ने उन्हें जबरन वहां से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया है।
ताज़ा अपडेट: भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरन अस्पताल में कराया भर्ती, हालत नाजुक
लद्दाख / नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग ओर लद्दाख को विशेष संवैधानिक दर्जा (छठी अनुसूची) दिलाने और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर पिछले 15 से अधिक दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को आज स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की टीम द्वारा उनके स्वास्थ्य को लेकर जताई गई गंभीर चिंता के बाद यह कदम उठाया गया।
अनशन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती
चश्मदीदों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, आज सुबह अनशन स्थल पर अचानक भारी संख्या में पुलिस बल और डॉक्टरों की एक विशेष टीम पहुंची। 15 दिनों से अधिक समय से बिना कुछ खाए-पिए अनशन करने के कारण वांगचुक शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो चुके थे और उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक गिर गया था।
सुरक्षा बलों ने कानून-व्यवस्था और वांगचुक की जान को खतरे का हवाला देते हुए उन्हें वहां से उठाया। इस दौरान वहां मौजूद उनके समर्थकों और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल के आईसीयू (ICU) / स्पेशल वार्ड में शिफ्ट कर दिया।
डॉक्टरों की निगरानी में इलाज शुरू
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, सोनम वांगचुक को तुरंत ड्रिप (IV Fluids) और आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इतने लंबे समय तक उपवास रखने के कारण उनके शरीर के अंगों (Organ functions) पर बुरा असर पड़ने का खतरा मंडरा रहा था, जिसके कारण तुरंत मेडिकल हस्तक्षेप जरूरी था। फिलहाल डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है।
समर्थकों में भारी आक्रोश, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने की खबर मिलते ही लद्दाख समेत पूरे देश में उनके समर्थकों के बीच गुस्सा फैल गया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे 'प्रशासन की तानाशाही' बता रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।
ट्विटर (X) पर प्रतिक्रिया: "एक सच्चे देशभक्त और वैज्ञानिक को अपनी ही जमीन बचाने के लिए इस तरह अस्पताल के बिस्तर पर पहुंचा दिया गया। यह बेहद दुखद है। सरकार को उनकी बात सुननी ही होगी।"
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग ओर लद्दाख के नाजुक पर्यावरण को बचाने, कॉर्पोरेट खनन को रोकने और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनने के बाद स्थानीय लोगों के भूमि व रोजगार अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक छठी अनुसूची (6th Schedule) लागू करने की मांग कर रहे हैं। बॉलीवुड अभिनेता ओमी वैद्य ('3 इडियट्स' के चतुर) समेत देश की कई बड़ी हस्तियों ने भी हाल ही में उनकी जान बचाने और इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की थी।
प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से सोनम वांगचुक के जीवन की रक्षा के लिए उठाया गया है, जबकि आंदोलनकारी अब अस्पताल के बाहर भी अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने की रणनीति बना रहे हैं।

