मंत्रोच्चारण और शुद्धीकरण पड़ गया भारी! पिछड़ी जाति के HM का तबादला होते ही कुर्सी पर छिड़का गंगाजल, मुजफ्फरपुर में भूमिहार हेडमास्टर निलंबित
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से सामाजिक समरसता को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। मुरौल स्थित राजकीयकृत शिवनंदन उच्च माध्यमिक विद्यालय में OBC वर्ग (निषाद जाति) से आने वाले निवर्तमान प्रधानाध्यापक सुशील कुमार चौधरी का तबादला होने के बाद नए प्रभारी एचएम ज्ञान प्रकाश द्वारा कुर्सी और कार्यालय का ‘शुद्धीकरण’ करने पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है।
पिछड़ी जाति के एचएम हटे तो कुर्सी का करने लगे ‘शुद्धीकरण’ मामले के अनुसार, पूर्व प्रधानाध्यापक सुशील कुमार चौधरी के तबादले के बाद भूमिहार समुदाय से आने वाले शिक्षक ज्ञान प्रकाश ने प्रभार संभाला। आरोप है कि प्रभार लेते ही उन्होंने पूर्व एचएम की कुर्सी और पूरे कार्यालय कक्ष का गंगाजल छिड़ककर तथा मंत्रोच्चारण के साथ ‘शुद्धीकरण’ शुरू कर दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया।
DEO का कड़ा एक्शन: ज्ञान प्रकाश निलंबित, वेतन रोका मामला तूल पकड़ते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविन्द सिन्हा ने इस कृत को गंभीर अनुशासनहीनता, जातिगत आचरण और सरकारी नियमों का उल्लंघन माना। डीईओ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभारी प्रधानाध्यापक ज्ञान प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उनका वेतन भी रोक दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा कार्यालय, सकरा तय किया गया है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश, कानूनी कार्रवाई की तैयारी घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई सामाजिक और जातीय संगठनों ने इसे जातिगत भेदभाव का प्रत्यक्ष उदाहरण बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठनों का कहना है कि सिर्फ प्रशासनिक निलंबन काफी नहीं है, आरोपी शिक्षक पर अनुसूचित जाति/जनजाति या पिछड़े वर्ग के अपमान से जुड़ी सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मास्टर साहब की सफाई: "साजिश के तहत बनाया गया वीडियो" वहीं, निलंबन की गाज गिरने के बाद आरोपी हेडमास्टर ज्ञान प्रकाश ने जातिगत विद्वेष के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने सफाई में कहा कि वे नियमित रूप से मां शारदे की पूजा-अर्चना करते हैं और गंगाजल छिड़कना उनकी पूजा का हिस्सा था। उन्होंने दावा किया कि कुछ सहकर्मियों ने आपसी बातचीत और मजाक के वीडियो को गलत तरीके से पेश कर वायरल किया है।
फिलहाल, शिक्षा विभाग ने मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी है, वहीं स्थानीय सामाजिक संगठनों के कड़े रुख को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी मामले पर नजर बनाए हुए है।

