पर्ची से मिली जीत के बाद चर्चाएं तेज: क्या कुशलगढ़ में फिर 'नेता प्रतिपक्ष' बनेंगे रजनीकांत खाब्या?
कुशलगढ़ (बांसवाड़ा)।
साधारण कार्यकर्ता ने दी कड़ी टक्कर, बराबरी पर छूटा मुकाबला
वार्ड नंबर 14 का मुकाबला इस चुनाव का सबसे चर्चित और रोमांचक मुकाबला साबित हुआ। राजनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत माने जाने वाले ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष खाब्या के सामने भाजपा ने बोहरा समाज के एक साधारण कार्यकर्ता कलीमुद्दीन को मैदान में उतारा था। कलीमुद्दीन ने खाब्या को ऐसी कड़ी टक्कर दी कि मतगणना के अंत में दोनों प्रत्याशियों को बराबर मत प्राप्त हुए। इसके बाद निर्वाचन नियमों के तहत पर्ची (लॉटरी) निकालकर विजेता का फैसला किया गया, जिसमें भाग्य ने खाब्या का साथ दिया और वे विजयी घोषित हुए। मामूली संसाधनों के बावजूद कलीमुद्दीन के इस दमदार प्रदर्शन की पूरे नगर में सराहना हो रही है।
पिछले कार्यकाल और नई चुनौतियों पर सवाल
पूर्व नगर पालिका बोर्ड में खाब्या नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। हालांकि, उस दौरान भाजपा के अंदरूनी कलह के बावजूद विपक्ष द्वारा आक्रामक भूमिका न निभाने और खाब्या की कथित 'चुप रहने की नीति' को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, विपक्ष की सुस्ती के चलते विकास कार्य भी प्रभावित हुए थे।
अब नए बोर्ड में खाब्या की जीत के बाद यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या कांग्रेस पार्टी उन्हें पुनः नेता प्रतिपक्ष बनाएगी? यदि संगठन उन पर दोबारा भरोसा जताता है, तो इस बार उनके सामने अपनी पिछली छवि से इतर एक सक्रिय, मुखर और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने की बड़ी चुनौती होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष किस तरह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।

