चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (CAS) ने अगस्त 2026 में पृथ्वी और चंद्रमा (लगभग 4,00,000 किलोमीटर दूर) के बीच सफल टू-वे (Two-way) लेजर कम्युनिकेशन लिंक का परीक्षण पूरा किया है।
अंतरिक्ष तकनीक में चीन की बड़ी उपलब्धि: पृथ्वी से चांद तक 4 लाख किमी दूर बिछाया 'लेजर इंटरनेट'
बीजिंग: अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के क्षेत्र में चीन ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
इस सफल परीक्षण के साथ ही चीन ने डीप स्पेस (गहरे अंतरिक्ष) मिशनों के लिए लेजर इंटरनेट का मार्ग प्रशस्त कर दिया है, जिससे पारंपरिक रेडियो सिग्नल आधारित संचार प्रणाली को एक तेज और सुरक्षित विकल्प मिल गया है।
क्यों खास है यह तकनीक?
100 Mbps तक की स्पीड: इस परीक्षण में डाउनलिंक स्पीड 100 Mbps और अपलिंक स्पीड 1.25 Mbps दर्ज की गई।
समय की भारी बचत: पारंपरिक माइक्रोवेव लिंक (5 Mbps) से चांद से 8K हाई-डेफिनिशन तस्वीर डाउनलोड करने में 4 से 5 मिनट का समय लगता था, जबकि इस नए लेजर नेटवर्क से यह काम मात्र 12 सेकंड में पूरा हो गया।
हाई-बैंडविड्थ और सुरक्षा: रेडियो तरंगों की तुलना में लेजर कम्युनिकेशन बहुत अधिक डेटा भेजने में सक्षम है, इसका साइज कॉम्पैक्ट होता है और यह बेहद सुरक्षित माना जाता है।
तीन बड़ी चुनौतियों पर पाई फतह
4 लाख किलोमीटर दूर लेजर सिग्नल भेजना 'हजारों किलोमीटर दूर से सुई में धागा पिरोने' जैसा कठिन काम है:
बीम संरेखण (Beam Alignment): अंतरिक्ष यान की थोड़ी सी भी हलचल से सिग्नल भटक सकता था।
वैज्ञानिकों ने एक विशेष ऑटो-ट्रैकिंग सिस्टम से लगातार सटीक निशाना बनाए रखा। कमजोर सिग्नल को पकड़ना: पृथ्वी तक पहुंचते-पहुंचते लेजर सिग्नल में कुछ ही फोटॉन (प्रकाश कण) बचते हैं।
इसके लिए अति-संवेदनशील सिंगल-फोटॉन डिटेक्शन तकनीक विकसित की गई। शोर व व्यवधान दूर करना: चांदनी, तारों की रोशनी और शहरों की लाइटों के शोर के बीच से सही सिग्नल निकालने के लिए विशेष कोडिंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया गया।
भविष्य के चंद्र मिशनों पर प्रभाव
यह सफलता चीन के आगामी मानवयुक्त चंद्र अभियानों (Crewed Lunar Landings) और इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन (ILRS) के निर्माण के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

